आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

From the desk of executive editor/Nishant karpatne

आपदा अधिनियम की धारा 2 (D) के अनुसार- “किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानवकृत कारणों से या उपेक्षा से उद्भूत कोई महाविपत्ति…”।

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के देश में लागू कुछ प्रावधानों का संक्षिप्त विवरण-

धारा- 51 (बाधा डालना)
यदि कोई व्यक्ति किसी राजकीय कर्मचारी को उनके कर्तव्यों को पूरा करने से रोकता या बाधा डालता है, या केंद्र/राज्य सरकारों या एनडीएमए द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करने से इनकार करता है तो वह व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दण्डित किया जा
सकता है।

दण्ड प्रावधान-

  • इस धारा के अंतर्गत, 1 वर्ष तक की कैद एवं जुर्माना।
  • यदि उस व्यक्ति के कार्यों से जानमाल का नुकसान होता है, तो 2 वर्ष तक की कैद एवं जुर्माना ।

धारा- 52 ( मिथ्या दावे)
इस धारा के अंतर्गत, वह मामले सम्मिलित जहाँ यह आरोप लगाया जाए कि अभियुक्त ने कुछ ऐसा लाभ (राहत, सहायता, मरम्मत, निर्माण या अन्य फायदे) का दावा किया जो कि मिथ्या हो।

दण्ड प्रावधान –

  • धारा के अंतर्गत, दोषसिद्धि पर, कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंड का प्रावधान ।

धारा – 53 ( धन/सामग्री का दुरुपयोजन )
यदि कोई व्यक्ति राहत कार्यों/प्रयासों के लिए किसी भी पैसे या सामग्री का दुरुपयोग, अपने स्वयं के उपयोग के लिए करता है, या उन्हें ब्लैक में बेचता है तो वह इस धारा के अंतर्गत दोषी ठहराया जा सकता है।

दण्ड प्रावधान-
इस धारा के अंतर्गत 2 वर्ष तक की कैद एवं जुर्माने का प्रावधान ।

धारा- 54 ( मिथ्या चेतावनी)

  • यदि कोई व्यक्ति एक झूठा अलार्म या आपदा के बारे में चेतावनी देता है, या इसकी गंभीरता के बारे में चेतावनी देता है, जिससे घबराहट फैलती है जोकि वह जानता है कि झूठी है, तो उसका यह कृत्य इस धारा के अंतर्गत दंडनीय होगा।
  • इस धारा के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति ऐसा प्रयास करता है कि इस आपदा या उसकी गंभीरता के सम्बन्ध में आम जनता के बीच आतंक का फैलाव हो तो उसे इस धारा के अंतर्गत दण्डित किया जा सकता है।

दण्ड प्रावधान –
इस धारा के अंतर्गत, एक वर्ष तक का कारावास या जुर्माने का प्रावधान ।

धारा- 55
(राजकीय विभागों द्वारा अपराध से सम्बंधित)

धारा- 56 (अधिकारी की कर्त्तव्य-पालन में असफलता)
यदि एक राजाकीय अधिकारी, जिसे लॉकडाउन से संबंधित कुछ कर्तव्यों को करने को निर्देशित किय गया है, और वह उन्हें करने से मना कर देता है, या बिना अनुमति के अपने कर्तव्यों को पूरा करने से पीछे हट जाता है तो वह इस धारा के अंतर्गत ठहराया जा सकता है दोषी ।

दण्ड प्रावधान-
इस धारा के अन्तर्गतं, 1 वर्ष तक की कैद या जुर्माने का प्रावधान ।

धारा- 57 (अध्यपेक्षा के सम्बन्ध में किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्ति)

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राज्य कार्यकारिणी समिति, या जिला कार्यकारिणी समिति को यह शक्ति दी गयी है कि वह किसी भी संसाधन, वाहन या भवनों की आवश्यकता पड़ने पर, जो उसे आपदा के जवाब में अपना काम करने के लिए चाहिए या आवश्यकता है, तो वह उसकी मांग रुपी आदेश कर सके अर्थात ऐसे संसाधन, वाहन या भवनों के सम्बन्ध में अध्यपेक्षा का आदेश जारी किया जा सकता है।
    इसी सम्बन्ध में, धारा 57 के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति इस तरह के अपेक्षित आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो वह इस धारा के अंतर्गत ठहराया जा सकता है दोषी ।

दण्ड प्रावधान-
1 वर्ष तक की कैद एवं जुर्माने का प्रावधान ।

धारा- 58-
कंपनियों द्वारा अपराध से सम्बंधित।

धारा – 59
अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी (धारा 55 और धारा 56 के मामलों में) से सम्बंधित ।

धारा- 60
न्यायालयों द्वारा अपराधों के संज्ञान से सम्बंधित ।

यह भी जानें –
IPC की धारा 153 –
(उपद्रव कराने के आशय से बेहूदगी से प्रकोपित करना)
भारतीय दंड संहिता की धारा 153 के अनुसार, जो भी कोई अवैध बात करके किसी व्यक्ति को द्वेषभाव या बेहूदगी से प्रकोपित करने के आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप उपद्रव का अपराध हो सकता है,

  • यदि उपद्रव होता है
    दण्ड – एक वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों।
    (जमानती, संज्ञेय अपराध, कोई मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय)
  • यदि उपद्रव नहीं होता है
    दण्ड – छह महीने कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों।

(जमानती, संज्ञेय अपराध, प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय)

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