आज राजभवन स्थित राजेन्द्र मंडप में महामहिम राज्यपाल श्री फागू
चैहान एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में ख्यातिप्राप्त
‘गाँधी कथा’ वाचिका डाॅ॰ श्रीमती शोभना राधाकृष्णा द्वारा अत्यन्त
ज्ञानवर्द्धक, रोचक एवं भावपूर्ण रूप में ‘गाँधी कथा’ प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150वें जयन्ती वर्ष में पटना विश्वविद्यालय द्वारा
संयोजित किया गया था। ‘गाँधी कथा’ के इस आयोजन में महामहिम राज्यपाल एवं
माननीय मुख्यमंत्री के अलावे
माननीय उप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष श्री विजय
कुमार चैधरी, बिहार विधान परिषद्् के कार्यवाहक सभापति मो॰ हारूण रशीद,
शिक्षा मंत्री श्री कृष्ण नन्दन प्रसाद वर्मा सहित राज्यमंत्रिपरिषद्् के कई मंत्रिगण,
विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति/प्रतिकुलपतिगण, प्राध्यापकगण, विद्यार्थीगण,
विद्वदजन, पदाधिकारीगण, बुद्धिजीवीगण तथा राष्ट्रपिता गाँधी के जीवन-दर्शन के प्रति
श्रद्धावान जन शामिल हुए।

कार्यक्रम में स्वागत-भाषण पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रासबिहारी

प्रसाद सिंह एवं धन्यवाद-ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रो॰ डाॅली सिन्हा ने किया।

कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल ने गाँधी कथा-वाचिका डाॅ॰
शोभना राधाकृष्णा को अंगवस्त्रम््, स्मृतिचिह्न एवं पुष्प-गुच्छ देकर सम्मानित
किया। माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कथा वाचिका डाॅ॰ शोभना
राधाकृष्णा तथा श्री रवि चोपड़ा को बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित
दो पुस्तकें -(1). ‘‘बापू की पाती’’ तथा (2). ‘‘एक था मोहन’’ सप्रेम
भेंट किया एवं उन्हें बताया कि बिहार के सभी विद्यालयों में ‘गाँधी कथा’
का नियमित वाचन होता है तथा विद्यार्थीगण राष्ट्रपिता गाँधी के जीवन और
दर्शन से प्रेरणा ग्रहण कर अत्यन्त लाभान्वित हो रहे हैं। कथा-वाचिका
डाॅ॰ श्रीमती शोभना राधाकृष्णा ने भी महामहिम राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री
एवं उप मुख्यमंत्री को अंग्रेजी में लिखी अपनी किताब सादर भंेट की।

कार्यक्रम में ‘गाँधी कथा’ प्रस्तुत करते हुए कथा-वाचिका डाॅ॰
शोभना राधाकृष्णा ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की ‘चम्पारण यात्रा’ की कथा
को प्रस्तुत किया और अत्यन्त मार्मिक ढंग से गाँधी के व्यक्तित्व के विभिन्न
पहलुओं एवं संदेशों को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गाँधी की

‘चम्पारण यात्रा’ भारत के साथ-साथ संपूर्ण दुनियाँ के लिए निर्भयता का संदेश
थी। उन्होंने कहा कि गाँधी व्यावहारिक आदर्शवादी थे। कथावाचिका ने
कहा कि श्रद्धा और पुरूषार्थ का महाकाव्यीय सम्मिलन है- गाँधी का व्यक्तित्व।
गाँधी ने सत्य के साथ प्रयोग किए। उन्होंने अपने जीवन को ही अपना संदेश
बताया।

कथा वाचिका ने कहा कि राष्ट्रपिता गाँधी के जीवन से सर्वधर्म सदाशयता,
स्वच्छता, सत्य और अहिंसा, साध्य-साधन-पवित्रता तथा सत्याग्रह के प्रति दृढ़ता आदि
की शिक्षा हमें मिलती है। उन्होंने कहा कि गाँधीजी बिहारियों पर काफी
विश्वास करते थे। वे बिहारियों की विनम्रता, सादगी, भलमनसाहत, सत्य के प्रति
दृढ़ता और अभयता के कायल थे। उन्होंने अपनी बिहार-यात्रा के दौरान
गाँधी मैदान में अपने संबोधन में भूमि के समान वितरण की बात कही थी,
जिसके आलोक में बिहार में बाद में कानून बना दिया गया। कथा-वाचिका ने
कहा कि गाँधी जी ने अपनी चम्पारण-यात्रा के दौरान किसानों को सत्याग्रह और
निडरता के गुरूमंत्र दिये तथा महिलाओं को स्वावलंबन और शिक्षा ग्रहण करने
की महती प्रेरणा दी।

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