बीसीए अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी के विशाल व्यक्तित्व व अद्वितीय प्रतिभा बिहार क्रिकेट के लिए संजीवनी


पटना, 6 जून, 2020। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री राकेश कुमार तिवारी के विशाल व्यक्तित्व, संकल्प तथा अद्वितीय प्रतिभा बिहार में क्रिकेट के विकास में संजीवनी का काम कर रही है। इनके कुशल नेतृत्व में मात्र आठ महीने में क्रिकेट की गतिविधियों के उत्तरोतर वृद्धि के लिए बीसीसीआई से लेकर राज्य के आखिरी पायदान तक जो कार्य हुए हैं उस पर बीसीए के वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारियों ने जो अपनी-अपनी भावनाएं व्यक्त कीं वह सही मायने में आने वाले दिनों में इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। पिछले कुछ दिनों से बिहार क्रिकेट को लेकर तरह-तरह की हो रही चर्चाओं के बाद ऐसे निष्कर्ष निकलते दिख रहे हैं।
बीसीए के सीओएम के सदस्य व जिला संघों के प्रतिनिधि श्री संजय कुमार तथा बीसीए के पूर्व सचिव श्री रविशंकर प्रसाद सिंह द्वारा मीडिया के माध्यम से किये जा रहे जनसंवाद से स्वत: स्पष्ट है कि बीसीए के अध्यक्ष श्री राकेश कुमार तिवारी के नेतृत्व वाली वर्तमान कमेटी संवैधानिक व लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरुप अपने प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इन दोनों वर्तमान व पूर्व के पदाधिकारियों द्वारा बीसीए के कार्यों के संबंध में दी गई अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं अपने आप में विकास की कहानी कहती है। बीसीए के जिला संघों के प्रतिनिधि श्री संजय कुमार द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि संघ के अंदर किसी भी तरह का विवाद नहीं है और कुछ लोग विवाद का भ्रम पैदा कर संघ को बदनाम करना चाहते हैं। बीसीए का उद्देश्य खेल का विकास है और इससे किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। वर्तमान कमेटी अपने तीन वर्षों के कार्यकाल में अच्छे परिणाम देगी। इनके द्वारा बीसीसीआई से आवंटित महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय सीरीज का सफल संचालन, बिहार की टीम का विभिन्न आयु वर्ग में किये गए प्रदर्शन एवं राज्य के अंदर अबतक हुई क्रिकेट के गतिविधियों के बारे में किये गए संवाद बीसीए की सफलता का जीता-जागता नमूना है।
बीसीए के पूर्व सचिव रविशंकर प्रसाद सिंह द्वारा बीसीए के अध्यक्ष श्री राकेश कुमार तिवारी को एक व्यवहार कुशल व्यक्तित्व बताते हुए एवं सबों को साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता वाला प्रशासक माना गया है। साथ ही श्री सिंह द्वारा उनके व्यक्तित्व का सम्मान करते हुए पूर्ण सहयोग की बात अपने आप में काबिलेतारीफ है। ऐसी सोच एवं संकल्प से वह दिन दूर नहीं कि बिहार भी मुंबई, पश्चिम बंगाल, गुजरात, विदर्भ, कर्नाटक जैसे राज्यों व टीमों की श्रेणी में अपना स्थान प्राप्त कर सकेगा।

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