कोरोना काल मेरे जीवन के लिये दु:खो से भरा काल है , सरकार से भी कुछ नही मिल रहा लाभ : कंचन देवी ओटो चालक पटना

by sunayana singh

सुनयना सिंह से टेलीफोनिक बातचीत मे पटना की महिला ऑटो चालक कंचन देवी ने अपनी दुखो से भरी कहानी सुनाई जिसे आप से जान कर आपको दुख से ज्यादा आश्चर्य होगा |
कंचन देवी बताती है की हमारी जिंदगी तो पहले से ही दुखो से भरी थी फिर भी मै अपने जीवन मे संघर्ष कर ज़िन्दगी जी रही थी लेकिन इस कोरोना काल मे हमारी जिंदगी जैसे दुखों से भरा काल बन गया हो, इस कोरोना ने मेरे जीवन मे विपरीत असर डाला है |

पटना शहरी क्षेत्र मे ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण -पोषण करती थी आमदनी का बस यही एक जरिया है, आज तीन महीने से काम ठप पड़ा है, होली के वक्त कुछ जमा पूंजी रखी थी वो भी ख़त्म हो गए अब तो जैसे कर्ज लेकर और भीख लेकर जिंदगी जीनी पड़ रही है, तीन बेटियों की विधवा माँ हूं अपनी भूख से ज्यादा इनके पेट की चिन्ता हर रोज सताती है, घर मे गैस ख़त्म होने पे खाना नही बन पता पड़ोस के लोग दया कर खाना दे जाते हैँ तो हमारा भूख मिटता है कंकरबाग भूतनाथ मे किराये के मकान मे अपने बच्चों के साथ रहती हुँ अब तो किराया देने तक के पैसे नही है, कब तक ये कोरोना और लॉकडाउन चलेगा तब तक हमारी जिंदगी चल पायेंगी की नही सोच- सोच कर चिंतित रहती हुँ.

सरकार से मिली थी झूठे सम्मान और झूठे वादे :

आगे कंचन अपने सम्मान मे मिले उपहार को दिखाते हुए बताती है की ये वही फोटो है जिस मे हमें पटना के सभी पत्रकार फोटो लेने और अखबारों मे हमारी तस्वीर को छापा था, 2017 मे महिला दिवस पर मार्च मे विद्यापति भवन मे सम्मानित किया गया था और मुझे एक नया ऑटो देने का घोषणा भाजपा के नेता विधायक , मंत्री नित्यानंद राय के द्वारा किया गया था जो आज तीन वर्ष बीत जाने पर भी मुझे नही मिला. अपनी समस्या को लेकर मैं भाजपा ऑफिस भी गई थी अपने पड़ोसियों के कहने पर लेकिन वहा भी मुझ से सब ने मेरी व्यथा सुनी मेरा समय बर्बाद यह ख कर किया कि बड़े साहेब आएंगे तो आपका देखता हुँ साहेब का इंतज़ार कर सुबह से शाम हो जाने पर मुझे वापस घर जाने को कहा, फिर बुलाया जायेगा अपना संपर्क नंबर लिखा दो, इन्ही सबो मे मुझे फसा के रखा गया आज मैं इतनी मुश्किल मे जिंदगी जी रही हुँ विधवा माँ हुँ मुझे विधवा पेंसन भी नही मिल पाता और, जहा मेरे जैसे दुखियो के लिए सरकार हर रोज नई नई योजनाओं की घोषणा कर रहे राहत भी दिया जा रहा फिर मुझे इस विधवा के दुख को क्यों नही सुनते या सब सिर्फ झूठा वादा और दिखावा होता है, आप लोग हमारे लिये कुछ तो कीजिये कह कर रोते रोते हाथ जोड़ कर विनती करती है.

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