विक्की गुप्ता अपने और अपने दोस्तों की मदद से भूखों को खाना बांटता है


“”रात नहीं ख्वाब बदलता है,
मंजिल नहीं कारवाँ बदलता है;
जज्बा रखो जीतने का क्यूंकि,
किस्मत बदले न बदले ,
पर वक्त जरुर बदलता है””

एक तरफ जहां कोरोना को लेकर पूरा देश मे लॉकडाउन है। आज लॉकडाउन का 30 दिन पूरे हो चुके है। लॉकडाउन के इस माहौल में गरीब और असहाय लोगों की मदद करने में समाज के कई लोग संस्थागत तौर पर लगे हैं तो कई लोग व्यक्तिगत तौर पर अपने सामर्थ्य के हिसाब से  मदद कर रहें  है // जीवन का सबसे जरूरी सवाल है: आप दूसरों के लिए क्या कर रहे हैं?  सेवा परमो धर्म के तर्ज़ पर समाज के एक छोटी सी जिम्मेदारी के तहत  गौड़िया  मठ मीठापुर का गौरव कुमार उर्फ विक्की गुप्ता अपने और अपने दोस्तों सोनू;लकी;अजय ;संजय साहनी ;राज;गौतम;चन्दन;सतबीर;और दीपक  की मदद से भूखों  को  खाना बांटता है.   स्लम  बस्ति फुटपाथ पे रहने वाले विकलांग वृद्ध  रिक्शा और ठेलावाले  को घूम घूम कर खाना  देता दोस्तों का ये संगठन   निरंतर सेवा प्रदान कर रहा है.  विक्की ने अपने दोस्तों के साथ गौरिया मठ मंदिर में भी सेवा    प्रदान किया है।


// जीवन का सबसे जरूरी सवाल है: आप दूसरों के लिए क्या कर रहे हैं?  सेवा परमो धर्म ://
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