ज्ञान भवन में आयोजित महिला उद्यमी मेला आये बड़ी संख्या में दर्षक

ज्ञान भवन पटना में लगे महिला उद्दमी मेला  में रूचि चौधरी के स्टाल  “अप्सटीच ” पर  लैपटॉप बैग,क्लच, पर्स, मोबाइल कवर, बैग,काथा स्टिच से निर्मित ऐसी और बहुत से आकर्षक उत्पाद  उपलब्ध हैं जो लोगों  को काफी पसंद आ रहा 

23 फरवरी, 2020/पटना।
गाॅधी मैदान के उत्तर स्थित ज्ञान भवन में आयोजित महिला उद्यमी मेला
के दूसरे दिन लोगों ने लगभग सात लाख सात हजार की खरीदारी की थी और आज
चार दिवसीय महिला मेला का तीसरा दिन रविवार की बंदी के कारण काफी चहल- पहल वाला
रहा। मेला में क्रेताओं के साथ ही साथ बड़ी संख्या में दर्षक भी आये। विदित
हो कि महिला विकास निगम द्वारा आयोजित चार दिवसीय मेले में राज्य के विभिन्न जिलों से
लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा उद्यमियों एवं स्टार्टअप वाली युवतियों द्वारा अपने
उत्पादों की बिक्री सह प्रदर्षनी लगायी गयी हैं। यह मेला 24 फरवरी 2010 तक
चलेगा। मेला का उद्देष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने हेतु
उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना है।

अपने उज्जवल भविष्य का सपना सजोकर अनेक युवा लड़कियां अपने हाथ में ब्रष
और पेंट लेकर मेला में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की हैं। वे ना केवल अपना
भविष्य सवांर रही हैं बल्कि अपनी जैसी अनेक लड़कियों को स्वरोजगार से जुड़ने
हेतु प्रेरणा का कार्य भी कर रही हैं। मेला में कुछ लड़कियां अपने डिजाईन के
दम पर स्वयं को स्थापित करने का माद्दा दिखा रही हैं। मुख्यमंत्री के जल जीवन
हरियाली योजना थीम को साकार करने तथा वातावरण में घट रहे आक्सीजन के स्तर को
संतुलित करने के उद्देष्य से घर को ही आक्सीजन पट्टी में तब्दील करने के लिए अपना
स्टार्टअप शुरू किया है, जिसे दर्षक काफी सराह रहे हैं। एक स्टार्टअप ऐसा भी देखने
को मिला जिसमें आप बिना मिट्ट और धूप के घरों के अन्दर पौधा लगाकर वातावरण
को सुरक्षित और सुगंधित बना सकते हैं। मेला में दैनिक उपयोग हेतु अलग ढंग और
अलग रंग की वस्तुएं भी उपलब्ध हैं। मेला का खास आकर्षण मेला के प्रवेष द्वार पर
स्थित सेल्फी जोन है, जहां बच्चे बुढ़े सभी लेने से नहीं चुक रहे हैं। हर लोग
सेल्फी जोन में जाकर अपनी यादों को समेट लेना चाहते हैं। आज मेले का विषेष
आकर्षण सांस्कृतिक संध्या में बनारस के गजल गायक अभिषेक पाठक एवं उर्वसी द्वारा अपनी
प्रस्तुति दी गयी, जिससे स्रोता भाव विभोर हो गये।
केसः 1 (फोटो-1) ब्रस एंड पेंट
मंडाला मधुबनी माॅडर्न आर्ट, कन्टेम्पररी और फ्यूजन को लेकर स्वेता
वर्मा ने इस मेला में षिरकत की हैं। मात्र दो साल में ही स्वेता ने अपने आप को
इतना मजबूती से स्थापित किया है कि दूसरे लोगों के लिए एक मिषाल बन गयी हैं। सबसे

बड़ी बात है कि स्वेता से सब कुछ अपने दम पर किया है। पेषा से वकील पिता और स्वास्थ्य
कर्मी मां की इच्छा थी कि स्वेता डाॅक्टर बने किन्तु स्वेता ने इससे इतर ताना बाना
बुनकर अपने भविष्य का सपना सजोया था, जिसमें वे अपने को काफी सफल मान रही हैं।
स्वेता ने बताया कि दो साल पहले उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर
दिल्ली से पेंटिंग का कोर्स किया और इस काम में लग गयी। शुरूआत में जब पेंटिंग का
सही दाम नहीं मिलता था तो काफी निराषा हेाती थी। उनके सामने सबसे बड़ी
चुनौती निराषा पर काबू पाना था। अतः कुछ नया करने की सोचा और अपने
प्रोडक्ट के लिए आॅनलाईन बिक्री के विकल्प को चुना। आज ना केवल उनकी
पेंटिंग बिक रही है बल्कि अच्छी कमाई भी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस
प्रकार के मेले से हमें हमारे पेंटिंग / प्रोडक्ट को लोगों को दिखाने के
साथ ही बिक्री का भी अवसर उपलब्ध कराता है और हमें भी लोगों से रूबरू होने
का अवसर मिलता है।
केसः 2 (फोटो-2) डिजायन पाॅइंट
पटना के लोग डिजाइन पाॅइंट से अपरिचित नहीं हैं ना ही सिम्मी शोषिया
किसी परिचय की मोहताज हैं। आज सिम्मी अपने काम की बदौलत एक मुकाम हासिल की हैं
और इनके डिजाइन पाॅइंट का वार्षिक टर्न ओभर बीस लाख से ज्यादा है।
टेक्सटाइल्स, मधुबनी, मंडाला, मेंहँदी, ग्राफिक डिजाइन, फोटोग्राफी और
आर्ट एंड क्राफ्ट को लेकर पटना में ही अपना सपना साकार कर रही सिम्मी को शुरूआती
दिनों में अपने परिवार में ही जद्दो जहद करना पड़ा। पेषे से नर्स माँ अपनी अन्य
बेटियों की तरह सिम्मी को भी डाॅक्टर बनाना चाहती थी किन्तु धुन की पक्की
सिम्मी ने अपने सपने के साथ कोई समझौता करने को तैयार नहीं हुई। उसने अपना
नामांकन पटना आर्ट काॅलेज में कराया, जहां से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई
पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उसने अपना एक सर्विसों बना लिया था और उसके जरिये
अपनी पहचान बनाना शुरू कर दिया था। परास्नातक की पढ़ाई समाप्त कर उन्होंने डिजायन
पाॅइंट नाम से अपना एक संस्थान खोला और प्रोफेषनली काम प्रारम्भ किया है।
अबतक सिम्मी ने जयपुर, दिल्ली और पटना जैसे शहरों में आयोजित अनेक मेला और
प्रदर्षनी में भाग लिया है, जहां उन्हें अपने कला का प्रदर्षन और बिक्री में
काफी मदद मिली है।
सिम्मी अपने कला को न केवल विविध आयाम दे रही हैं बल्कि अपनी जैसी अनेक
लड़कियों को प्रषिक्षित भी कर रही हैं। मेले को लेकर उनका कहना है कि इस तरह
के मेले से उन्हें काफी लाभ हुआ है। इसमें नये लोगों और संस्थाओं से
जान पहचान हो रही है और मेरे प्रोडक्ट भी बिक रहे हैं।
केसः 3 (फोटो-3) खादी रेवेलिआन(कावेरी)ः

खादी मेें नित नये प्रयोग के कारण आज लोगों में काफी लोकप्रिय हो रहा
है। आज खादी की मांग बढ़ी है और इसके साथ ही उसकी सुन्दरता में भी काफी
वृद्धि हुई है। इस कारण आज के युवा उद्यमियों में इसके प्रति आकर्षण बढ़ा है।
ऐसी ही एक उद्यमी का नाम है कावेरी सिंह। उन्होंने अपनी उद्यमिता के कारण प्रति माह
20 हजार से भी ज्यादा की आमदनी कर लेती हैं। उनका कहना है कि खादी से उनका
बचपन से लगाव था और उनके दादा जा का कहना था कि खादी एक आरामदायक वस़्त्र
है। अतः खादी में उन्होंने अनेक प्रयोग कर लोंगों की मांग के हिसाब से
बाजार में लाने का प्रयास किया है।
अर्थषास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद कावेदी ने पटना विमेन्स
काॅलेज से डिजायन में डिप्लोमा किया है तथा खादी को ही अपने डिजायन के लिए
चुना है। आज कावेरी अपने डिजायनर खादी के लिए जानी जाती हैं। खादी के साथ ही
साथ डिजायनर ज्वेलरी को भी आमदनी का माध्यम बनाया है। उन्होंने खादी
रिबेलिआन नाम से अपना संस्थान स्थापित किया है। उनकी ज्यादातर बिक्री आॅन लाइन
होती हैं
मेले को लेकर उनका कहना है िकइस प्रकार के मेले से उनका खास लगाव है।
उनके बनाये समान की ग्राहक काफी तारीफ करते हैं तो मन को काफी तसल्ली मिलती
हैं। मेला में आने से लोगों के साथ ही उद्यमियों से जुड़ने का अवसर मिलता
है।
केस: 4 (फोटो-4) ग्रीन सेल्टर (नुपुर नारायण)ः
नुपुर नारायण के स्टार्ट अप से बिहार सरकार की जल जीवन हरियाली वाली नजरियां पूर्ण
होती दिख रही है। नुपुर नरायाण का स्टार्ट अप घर की चार दिवारी के अन्दर ही
आॅक्सीजन जोन विकसित करने का एक नया प्रयोग जान पड़ता है। आज लोगों के पास जमीन
की कमी है और ऐसे में ग्रीन पट्टी विकसित करना असंभव जान पड़ता है किन्तु नुपुर
के प्रयोग से यह असंभव संभव होता दिख रहा है। उन्होंने अपने स्टार्ट अप में
वर्टिकल गार्डेन को चुना है। बिहार में इस प्रकार का स्टार्टअप कम है, ऐसा मानना
है नुपुर नारयण का।
नुपुर ने अपने स्टार्टअप की पहचान अपने दम पर दिलाया है। उनका कहना है कि पति
टेलीकाम विभाग में कार्यरत हैं और काफी व्यस्त रहते हैं। उनको छुट्टी
भी नहीं मिलती है। इस कारण इस कार्य में उनका सहयोग नहीं मिल पाता है। लेकिन
वे इस स्टार्टअप से काफी प्रभावित थे। अतः उनको नौकरी छोड़ना पड़ा और
मेरे साथ उन्होंने वर्टिकल गार्डन को ग्रीन सेल्टर के नाम से शुरू किया। उनका
मानना है कि यह आज के समाज के लिए जरूरी और उपयोगी दोनो हैं
नुपुर का कहना है कि उन्हें मेले में काफी एप्रिसियेषन मिला है। साथ ही
अच्छी बिक्री भी हो रही है। हम केवल प्लांट ही नहीं बेचते हैं बल्कि आवष्यकता

के अनुसार सेवायें भी प्रदान करते हैं। नुपुर के पौधे फ्लिप कार्ट, अमेजाॅन पर
भी आॅनलाइन बिक्री होती है। इसके लिए उनके साथ करार किया गया है।
केस: 5 (फोटो-5) यार्नमेण्ड (रष्मि)ः
आम तौर जुती का नाम सुनते ही आदमी के मन में चमड़े से बनी सामग्री का
चित्र हमारे दिमाग में बनता है। लेकिन रष्मि के स्टार्टअप से यह मिथ टूटता सा प्रतीत
होता है। उन्होंने बताया कि वे हर आयु वर्ग विषेषकर 18 से 40 वर्ष की आयु
को ध्यान रखकर यार्नमेंट को स्वरूप दिया है। उन्होंने बताया कि बचपन में अक्सर
अपना स्केच बनाया करती थी। बाद में उसे ही अपना भविष्य बनाने का मन बना लिया।
निफ्ट से ग्राफिक्स डिजाइनर कोर्स करने के बाद नीजी कम्पनी में काम के दौरान अपनी
कम्पनी बनाने की सोच आई और अपनी सहपाठी छाया के साथ मिलकर वर्ष 2018 में
यार्नमेण्ड के नाम से अपनी कम्पनी बना लिया। खादी और जूट का प्रयोग करते हुए
यार्नमेण्ड ने जुती बनाने का काम प्रारम्भ किया और इसे आगे बढ़ाया।
परिवार में काफी दबाव था कि मुझे मेडिकल की पढ़ाई करनी है। पिताजी पुलिस
सेवा में थे और भाई सिविल इंजिनियर था। सौभाग्य से मुझे भाई का काफी
सहयोग मिला, तभी मैं यह मुकाम हासिल कर सकी।
मेला में आकर मुझे काफी सकुन मिला है। यहां मुझे नये नये लोगों से
नये नये विचार मिल रहे हैं जिससे मेरे डिजाइन में सुधार करने और लोगों की
भावना के अनुरूप जुती बनाने में सहयोग मिलेगा। मुझे यहां आकर विष्वास हो रहा
है कि भविष्य में मेरे उत्पाद बिहार और बिहार के बाहर काफी पसंद किए जायेंगे।
लोगों की प्रतिक्रिया
मेले में कंकड़बाग से आयी एक दर्षक रेनु झा ने बताया कि मेले में साफ सफाई
काफी सराहनीय है। वहीं स्टाॅल का प्रबंधन भी अनुकरणीय है और लोगों की
सुविधा का खास खयाल रखा गया है। उन्हें हैंड मेड पर्स काफी पसंद आया। मोर
मोकामा की किरण देवी ने बताया कि यद्यपि वह अपना बुटिक घर से ही संचालित करती हैं
किन्तु मेले में आकर उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि उनके लिए भी मेला काफी
बड़ा अवसर है और भविष्य में वे भी अपने उत्पाद के साथ मेले में आयेगी।
मेला में आकर उन्हें बहुत से उभरते उद्यमियों से मिलने और उनके कार्य की
जानकारी मिली। कदमकुआं की रहने वाली सारा ने बताया कि मेले में वस्त्रों की
विविधता देखकर मन प्रफुलित हो गया। उन्हें खाने को देषी और विदेषी व्यंजन
काफी प्रभावित किया। महिला एवं युवा उद्यमियों को स्टाॅल मुफ्त में मिलने से
उन्हें एक बड़ा अवसर मिला है। मेला में पेड़ पौधा का प्रचार काफी सराहनीय लगा।
गोला रोड के अजय कुमार वर्मा ने बताया कि मेला का सजावट बहुत बढ़िया है और
महिलाओं ने खुलेमन से सेल्फी खींचा है। विधि व्यवस्था से वे काफी संतुष्ट
दिखे। फुलवारीषरीफ के राजू कुमार को मेला परिसर में लगाये गये पालनाघर से काफी

खुष थे। उन्होंने अपने बच्चों को पालना घर में रखकर स्वयं मेला का आनन्द
उठाया। मखनियां कुआं की निषा यादव को मेला में बिक रहे आम और आंवला का
आंचार बहुत पसंद आया। फुलवारीषरीफ की नेहा तानियां को आर्ट एंड क्राफ्ट के
सामान काफी पसंद आये। पटेल नगर के दीपक कुमार को फुड स्टाॅल में फुड की
विविधता ने काफी प्रभावित किया।

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