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नाट्यकार:अनिल कुमार मुखर्जी
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निर्देशन : उज्जवला गांगुली
कथासार
स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ,देश के विभाजन से उपजी समस्याओं का मुल केंद्र है नाटक- कॉकटेल।
देश विभाजन के बाद नयी कौम का जन्म हुआ,जिसे शरणार्थी का नाम दिया गया। आजादी का जश्न,सत्ता की भूख,भविष्य के सपनों के बीच मूल समस्या जैसे खो गई। लाखों लोग घर से बेघर हो गए।खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को मजबूर इन लोगों की समस्या दिनों – दिन बढ़ती गई। मां – बाप का साया छीना,सर से छत गई,अपनों का साथ छुटा, दाने -दाने को मुंहताज लोगों के सामने ना तो अपना घर रहा, ना तो समाज, ना ही वतन का नाम। सारे सपने,सारी हसरतें,सारे अरमान धू-धू कर जल गये और जले राख में जिंदा रही,किसी भी तरह पेट पालने की समस्या। नारकीय जीवन जीने को मजबुर इस नयी जाति को तिनके की तरह जो भी सहारा मिले, उसे अपना लिया।शरीर लगाकर,शरीर थका कर या शरीर बेचकर,कुछ भी कमा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

एक ऐसे ही शरणार्थी परिवार की कहानी जो आज भी सारी समस्याओं से घिरा समाज,राष्ट्र एवं देश के सामने एक बड़ा सवाल मुंह बाये खड़ा है।इन्ही प्रश्नों का जिंदा उदाहरण है- “कॉकटेल”!
शेष मंच पर
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मंच पर
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सोना मां : उज्जवला गांगुली
फणी : श्याम अग्रवाल
नणी : अल्ताफ रजा़
मणी : बिट्टु कुमार
चुणी : राज शेखर
चौधरी : हर्ष कुमार
मालिक : अविनाश ‘अकेला’
नेपथ्य
————- मंच परिकल्पना : प्रदीप गांगुली
मंच संयोजन: सुनील कुमार
प्रकाश संयोजन: रियाज़ अहमद
प्रकाश सहयोग: राजकुमार शर्मा
ध्वनि व संगीत: हनी एवं मनीष दिलदार
रूप सज्जा : उपेंद्र कुमार
वस्त्र विन्यास: मनीष
प्रस्तुति व मीडिया प्रभारी : राकेश कुमार
नाट्यकार: अनिल कुमार मुखर्जी
निर्देशक: उज्जवला गांगुली
आभार
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बिहार आर्ट थियेटर
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