Global media Update tech Update & Automobile Life Style & Entertainment

पटना, बिहार — पटना में एक 18 वर्षीय NEET अभ्यर्थी की मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) द्वारा की गई जांच में मामले से जुड़े साक्ष्यों में पुरुष जैविक पदार्थ की मौजूदगी सामने आने की जानकारी मिली है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, FSL की जैविक रिपोर्ट में घटनास्थल और पीड़िता के शरीर से लिए गए नमूनों में पुरुष शुक्राणु अथवा पुरुष आनुवंशिक सामग्री पाए जाने की बात सामने आई है। इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य माना जा रहा है, जिससे छात्रा की मौत की परिस्थितियों पर नए सवाल खड़े हो गए हैं और जांच की दिशा में बड़ा बदलाव आया है। (नोट: रिपोर्ट तैयार किए जाने तक पुलिस या FSL की ओर से आधिकारिक शब्दावली सार्वजनिक नहीं की गई है।)
यह मामला जहानाबाद जिले की एक युवती से जुड़ा है, जो पटना के एक कोचिंग हॉस्टल में रहकर नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी को वह अपने हॉस्टल के कमरे में अचेत अवस्था में पाई गई थी, जिसके बाद उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कुछ दिनों के इलाज के बाद उसकी मौत हो गई।
शुरुआत में पुलिस ने नींद की गोलियां खाने से आत्महत्या की आशंका जताई थी, लेकिन बाद में सामने आए चिकित्सकीय निष्कर्षों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए।
पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोटों का उल्लेख किया गया और यह संकेत दिया गया कि यौन हिंसा की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस रिपोर्ट ने शुरुआती पुलिस बयानों का खंडन किया और जन आक्रोश को और तेज कर दिया।
FSL की रिपोर्ट ने इस मामले में यौन उत्पीड़न की आशंका को और मजबूत किया है। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि संदिग्धों के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए जाएंगे या नहीं। जांच एजेंसियां अब डीएनए मिलान के जरिए जैविक साक्ष्यों को संभावित आरोपियों से जोड़ने की प्रक्रिया में जुट गई हैं। इस प्रक्रिया के तहत पीड़िता के परिजनों से भी नमूने लिए जा सकते हैं।
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट बिहार के पुलिस महानिदेशक को सौंप दी है। इसके साथ ही हॉस्टल स्टाफ, अस्पताल कर्मियों और छात्रा के अंतिम दिनों से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
यह मामला बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच की मांग की है। बदलते फॉरेंसिक साक्ष्यों और शुरुआती विरोधाभासी बयानों के बाद यह मांग और तेज हो गई है।
वहीं, विस्तारित समीक्षा में शामिल कुछ चिकित्सकीय विशेषज्ञों, जिनमें AIIMS से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं, ने चेतावनी दी है कि अधूरे रिकॉर्ड और दस्तावेजों में खामियां अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने में बाधा बन सकती हैं। उन्होंने जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के सख्त पालन पर जोर दिया है।
पीड़िता के परिवार ने जांच की धीमी गति और दिशा को लेकर बार-बार असंतोष जताया है। परिजनों का कहना है कि वे दोषियों की तत्काल पहचान, गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी परिवार के साथ खड़े होकर निष्पक्ष और पूर्ण जांच की मांग की है
Auto Amazon Links: No products found.