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पटना: प्रसिद्ध उद्योगपति और वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल के निधन से कारोबारी जगत और पटना शहर में शोक की लहर है। इस दुखद समाचार पर देश-विदेश से शोक संवेदनाएँ व्यक्त की जा रही हैं।
अपने गहरे दुख को व्यक्त करते हुए अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया मंच X पर एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने बेटे को खोने के दर्द का वर्णन किया। उन्होंने लिखा कि किसी माता-पिता के लिए अपने बच्चे को विदा करना सबसे बड़ा दुख होता है और एक बेटे का अपने पिता से पहले चले जाना असहनीय पीड़ा है।


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अपने बेटे के जीवन सफर को याद करते हुए अनिल अग्रवाल ने बताया कि अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार से निकलकर उन्होंने शक्ति, करुणा और उद्देश्य से भरा जीवन जिया। उन्होंने अग्निवेश को अपनी मां की जिंदगी की रोशनी, एक स्नेही भाई, वफादार मित्र और एक कोमल हृदय वाला इंसान बताया, जिसने हर मिलने वाले के दिल को छुआ।

अग्निवेश अग्रवाल बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे — वे खिलाड़ी, संगीतकार और एक कुशल नेतृत्वकर्ता थे। उन्होंने मेयो कॉलेज, अजमेर से शिक्षा प्राप्त की, ‘फुजैराह गोल्ड’ सहित कई सफल उपक्रमों की स्थापना की और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में भी कार्य किया। अपनी उपलब्धियों और ऊँचे पदों के बावजूद वे सरल, मिलनसार और मानवीय बने रहे।“मेरे लिए वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं था, वह मेरा दोस्त, मेरा गर्व और मेरी पूरी दुनिया था,” अनिल अग्रवाल ने लिखा। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी किरण इस अपूरणीय क्षति से पूरी तरह टूट चुके हैं।अपने संदेश में अनिल अग्रवाल ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपने बेटे के गहरे विश्वास का भी उल्लेख किया। अग्निवेश का सपना था कि कोई बच्चा भूखा न सोए, हर बच्चे को शिक्षा मिले, महिलाएँ आत्मनिर्भर बनें और हर युवा भारतीय को सार्थक रोजगार प्राप्त हो।अपने बेटे से किए गए वादे को दोहराते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि वे अपनी कमाई का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समाज को लौटाते रहेंगे और और भी सरल जीवन जीने का संकल्प लेते हैं।उन्होंने लिखा, “उसके सामने पूरा जीवन पड़ा था और कई सपने अधूरे रह गए।” अग्निवेश की अनुपस्थिति ने उनके परिवार और मित्रों के जीवन में एक ऐसा खालीपन छोड़ दिया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।
अंत में अनिल अग्रवाल ने इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने के लिए मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि अग्निवेश हमेशा उनके दिलों, उनके कार्यों और उन सभी लोगों के जीवन में जीवित रहेंगे जिन्हें उन्होंने छुआ।
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