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पटना विमेंस कॉलेज के जनसंचार विभाग द्वारा मीडिया क्लब के सहयोग से शनिवार को आमिर खान की बहुचर्चित फिल्म “सितारे ज़मीन पर” का प्रदर्शन किया गया। यह कार्यक्रम प्रातः 10:00 बजे कॉलेज के वेरोनिका ऑडिटोरियम में आरंभ हुआ, जिसमें कॉलेज के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।




यह फिल्म विशेष रूप से ऑटिज़्म (Autism) और डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) से ग्रसित बच्चों की भावनात्मक एवं मानसिक स्थिति को दर्शाती है। फिल्म में आमिर खान एक ऐसे बास्केटबॉल कोच की भूमिका निभाते हैं, जो इन विशेष बच्चों की प्रतिभा को पहचानता है और उन्हें आत्मविश्वास व नई दिशा प्रदान करता है।
इस कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग की विभागाध्यक्ष रोमा द्वारा किया गया। उन्होंने फिल्म के सामाजिक संदेश पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया।
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इसके साथ, डॉ. अपराजिता पाठक, सहायक प्रोफेसर, जनसंचार विभाग ने भी छात्रों को फिल्म की सैद्धांतिक और सामाजिक व्याख्या से परिचित कराया।उन्होंने मीडिया क्लब के संयोजक प्रशांत रवि को इस फिल्म की स्क्रीनिंग कराने के लिए धन्यवाद दिया.
फिल्म के माध्यम से स्वीकार्यता, सहानुभूति, धैर्य, रचनात्मकता, संवेदनशीलता और हर बच्चे की अनूठी प्रतिभा को पहचानने जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों को उजागर किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित प्रशांत रंजन, फिल्म निर्माता एवं फिल्म समीक्षक ने कहा कि “फिल्म सिर्फ एक माध्यम नहीं बल्कि समाज को देखने का नजरिया है। ‘सितारे ज़मीन पर’ हम सबकी फिल्म है, जो हमें सोचने पर मजबूर करती है।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि उनकी आगामी फिल्म की स्क्रीनिंग भी जल्द ही कॉलेज में आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं पाटलिपुत्र सिने सोसाइटी के श्री संजीव कुमार ने छात्रों को फिल्म निर्माण की ओर प्रोत्साहित करते हुए कहा, “बिहार को फिल्म निर्माण का केंद्र बनाना चाहिए। यहाँ की प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ सकती हैं।”

इस अवसर पर डॉ. नूपुर सिन्हा, अध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, ने फिल्म की मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से विवेचना करते हुए कहा कि “ऐसी फिल्में न केवल समाज में संवेदना उत्पन्न करती हैं, बल्कि हमें यह सिखाती हैं कि हर बच्चा विशेष है और उसे समझने की ज़रूरत है।”
जनसंचार विभाग व् मीडिया क्लब द्वारा आयोजित इस सार्थक आयोजन ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि छात्रों के भीतर सामाजिक समझ, रचनात्मक सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में मदद की
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