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पटना, 06 जुलाई, 2024:- माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति
श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने जे॰डी॰ वीमेंस काॅलेज, पटना के
सभागार में आयोजित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सीनेट की आठवीं बैठक
को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राओं को
समाज की आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा दी जानी चाहिए। औद्योगीकरण के दौर
में विद्यार्थियों को उद्योगांे की आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा दी जाती
थी, परन्तु आज की शिक्षा समाज की जरूरतों को पूरी करनेवाली होनी
चाहिए।
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राज्यपाल ने कहा कि अकादमिक गतिविधियों पर चर्चा के लिए आहूत
सीनेट की बैठक में हमें सिर्फ शैक्षिक मुद्दों एवं छात्र-छात्राओं
की पढ़ाई के विविध आयामों पर ही चर्चा करनी चाहिए। जब सीनेट के सदस्य
को विश्वविद्यालय के शिक्षा के स्तर के बारे में रूचि लेकर सोचेंगे तभी वह
आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि विश्व भर में नालंदा विश्वविद्यालय की
ख्याति वहाँ की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए थी। बिहार के विश्वविद्यालयों
को भी अपने शिक्षा के स्तर में सुधार लाकर वह गौरव प्राप्त करने का
प्रयत्न करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि ‘पाटलिपुत्र’ नाम से ही हमारी समृद्ध परंपरा और
इतिहास का बोध होता है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय को शैक्षिक जगत में
अपने नाम के अनुरूप स्थान प्राप्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे सोच और चिन्तन में लचीलापन होना
चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा काफी प्राचीन और समृद्ध है। इसे आज के परिप्रेक्ष्य
में सामने लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की
पढ़ाई में योग शिक्षा का प्रावधान किया गया है तथा डिफेंस स्टडीज
को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं सेंटर फाॅर हिस्टोरिकल
स्टडीज के चेयरमैन प्रो॰ हीरामन तिवारी ने ‘‘भारतीय ज्ञान परंपरा का
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में महत्व’’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।
बैठक में राज्यपाल के प्रधान सचिव श्री राॅबर्ट एल॰ चोंग्थू,
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ आर॰के॰ सिंह, प्रतिकुलपति प्रो॰
गणेश महतो, कुलसचिव प्रो॰ नागेन्द्र कुमार झा, सीनेट के सदस्यगण,
विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण, शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं
अन्य लोग उपस्थित थे।
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