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पटना, 17 जनवरी 2026: कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार तथा संगीत नाटक अकादमी, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शीत नाट्य उत्सव–2026 के अंतर्गत शुक्रवार की संध्या पटना के प्रेमचंद रंगशाला में नाटक ‘वैजयंती’ का भव्य मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 6 बजे हुआ, जिसमें रंगमंच प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


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नाटक ‘वैजयंती’ का लेखन प्रख्यात नाटककार डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह ने किया है, जबकि इसका सशक्त निर्देशन बिहार के वरिष्ठ रंगकर्मी विजयेंद्र (बिज्येन्द्र) कुमार टांक ने किया। यह नाटक डॉ. सिंह के चर्चित नाट्य संग्रह ‘नाट्य मंजरी’ से लिया गया है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री मिहिर कुमार सिंह, भा.प्र.से., विकास आयुक्त, बिहार सरकार उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में प्रणब कुमार, भा.प्र.से., सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार; श्रीमती रूबी, भा.प्र.से., निदेशक, सांस्कृतिक कार्य; श्री महमूद आलम, सचिव, संगीत नाटक अकादमी, पटना; सुश्री कीर्ति आलोक, सहायक सचिव, संगीत नाटक अकादमी, पटना; जिला कला पदाधिकारी, पटना तथा स्थानीय पार्षद डॉ. इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी मंचासीन रहे।


नाटक ‘वैजयंती’ में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न आयामों और उनके दार्शनिक दृष्टिकोण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा में गोपी लीला, महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को दिया गया गीता उपदेश, तथा युधिष्ठिर को युद्ध के औचित्य का बोध कराने जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों को समाहित किया गया। प्रस्तुति में श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप के साथ-साथ उनके मानवीय पक्ष को भी उकेरा गया, जो जीवन की जटिलताओं से जूझ रहे मनुष्य को समाधान का मार्ग दिखाता है।



नाटककार डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह ने पारंपरिक सूत्रधार के स्थान पर अर्जुन के प्रपौत्र जनमेजय को कथावाचक बनाकर कथा को एक नवीन दृष्टिकोण प्रदान किया। निर्देशक बिज्येन्द्र कुमार टांक ने सशक्त मंच संयोजन, भावपूर्ण अभिनय और तकनीकी प्रभावों के माध्यम से नाटक को जीवंत बना दिया।

प्रमुख भूमिकाओं में कृष्ण के रूप में विवेक कुमार मिश्रा, जनमेजय प्रिंस कुमार, वैशंपायन अभिषेक आनंद, अर्जुन जफर आलम, युधिष्ठिर गौतम गुलाल, बलराम सत्यम कुमार मिश्रा, भीम सरबिंद कुमार और द्रौपदी की भूमिका में महिमा ने प्रभावशाली अभिनय किया। अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने पात्रों के साथ न्याय किया।
तकनीकी पक्ष में वस्त्र विन्यास सुदामा प्रसाद, रूप सज्जा जितेंद्र कुमार जीतू एवं अंकिता पल्लव, संगीत रोहित चंद्रा, डिजिटल इफेक्ट अभिषेक ड्रामेबाज तथा प्रकाश परिकल्पना विनय कुमार का योगदान सराहनीय रहा।
नाटक की प्रस्तुति प्रवीण सांस्कृतिक मंच, पटना द्वारा की गई, जिसमें कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार और संगीत नाटक अकादमी, पटना का सहयोग रहा। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी रहे। शीत नाट्य उत्सव–2026 के अंतर्गत यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव सिद्ध हुई।
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