आत्महत्या की थ्योरी से बर्बरता तक — पटना हॉस्टल केस में ‘घटनास्थल’ (PO) की तलाश

पटना: शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की छात्रा की रहस्यमयी मौत की जांच अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. जिस मामले को स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में “पढ़ाई के दबाव में आत्महत्या” बताकर खारिज कर दिया था, वह अब एक जटिल हत्या की जांच में बदल चुका है. अब पूरी तफ्तीश एक ही सवाल पर टिक गई है: PO यानी प्लेस ऑफ ऑक्युरेंस (घटनास्थल).

18 जनवरी तक, आईजी (IG) जितेंद्र राणा और पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा की निगरानी में काम कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब सिर्फ यह नहीं पूछ रही कि कौन जिम्मेदार है, बल्कि यह तलाश रही है कि अपराध कहां हुआ. जांचकर्ताओं का मानना है कि हमले की सटीक जगह की पहचान ही इस त्रासदी से पर्दा उठाएगी.

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Shambhu Girls Hostel Case and the Death of a NEET Aspirant in Patna
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निर्णायक चरण: तीन थ्योरी, एक रहस्य

भले ही एसएसपी कार्तिकेय शर्मा को शुरुआत में मौत को आत्महत्या बताने में “जल्दबाजी” करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा हो, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पुलिस की मौजूदा “जांच की दिशा” (Line of Investigation) बिल्कुल सटीक है. एसआईटी अब घटनास्थल का पता लगाने के लिए तीन अलग-अलग थ्योरीज पर काम कर रही है:

थ्योरी 1: जहानाबाद कनेक्शन

जांचकर्ता छात्रा के पटना पहुंचने से पहले की स्थिति की जांच कर रहे हैं.

  • आधार: 5 जनवरी को जहानाबाद से ट्रेन में चढ़ते समय उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी?
  • जांच: क्या घर पर रहने के दौरान या ट्रेन यात्रा में कोई “असामान्य घटना” हुई थी? 26 दिसंबर से 5 जनवरी के बीच उसकी गतिविधियों और संपर्कों को मैप करने के लिए पुलिस की एक टीम जहानाबाद भेजी गई है.   

थ्योरी 2: “शहर” का कोण (City Angle)

यह थ्योरी राजधानी में उसके आने के तुरंत बाद की गतिविधियों पर केंद्रित है.

  • आधार: पटना जंक्शन पर उतरने के बाद, क्या वह हॉस्टल जाने से पहले किसी खास जगह गई या किसी से मिली?
  • अहम सवाल: क्या वह हॉस्टल पहुंचते समय डरी हुई या सदमे में थी, या वह बिल्कुल सामान्य थी?
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थ्योरी 3: हॉस्टल के भीतर का खौफ

अगर छात्रा हॉस्टल पूरी तरह सामान्य हालत में पहुंची थी, तो पूरा शक हॉस्टल की इमारत पर जाता है.

  • आधार: क्या अपराध—विशेष रूप से यौन हिंसा और मारपीट—शंभू गर्ल्स हॉस्टल के परिसर के भीतर, संभवतः उसके अपने कमरे में या इमारत के किसी अन्य हिस्से में हुआ?
  • सबूत: यह फिलहाल सबसे मजबूत कड़ी है, जिसका समर्थन ‘टाइमलाइन’ करती है. सीसीटीवी फुटेज पुष्टि करता है कि वह पटना जंक्शन पर दोपहर 3:05 बजे देखी गई और ठीक 14 मिनट बाद दोपहर 3:19 बजे हॉस्टल पहुंच गई. पारगमन (transit) के लिए यह 14 मिनट का समय इतना कम है कि रास्ते में किसी अपराध की गुंजाइश बहुत कम बचती है, जो सीधे तौर पर हॉस्टल की ओर इशारा करता है.   

“14 मिनट” की टाइमलाइन और बंद कमरा

जांच में एक बेहद सटीक टाइमलाइन सामने आई है जिसने शंभू गर्ल्स हॉस्टल को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है.

  • दोपहर 3:05 (5 जनवरी): छात्रा पटना जंक्शन के सीसीटीवी में कैद होती है.
  • दोपहर 3:19 (5 जनवरी): उसे चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में प्रवेश करते हुए रिकॉर्ड किया गया.
  • “बंद” कमरा: अगली सुबह (6 जनवरी) वह एक ऐसे कमरे में बेहोश पाई गई जो कथित तौर पर “अंदर से बंद” था.
  • पहेली: अगर हमला अंदर हुआ, तो अपराधी बंद कमरे से बाहर कैसे निकला? या क्या “बंद दरवाजे” की कहानी हॉस्टल स्टाफ द्वारा गढ़ी गई थी, जिन्होंने पुलिस के आने से पहले ही ताला “तोड़” दिया था?

फॉरेंसिक खुलासा: वो “संघर्ष” जिसने सब बदल दिया

चार दिनों तक, पूरी कहानी “आत्महत्या” की थ्योरी पर चल रही थी, जिसे कमरे से नींद की गोलियां मिलने और यूरिन रिपोर्ट में नशीली दवाओं के अंश मिलने से बल मिला था. लेकिन, पीएमसीएच (PMCH) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस दावे को ध्वस्त कर दिया और अस्तित्व के लिए हुए एक क्रूर संघर्ष का खुलासा किया:

  • बचाव के घाव (Defensive Wounds): छात्रा की छाती, गर्दन और कंधों पर “नाखूनों के गहरे निशान” (crescentic nail abrasions) मिले हैं—जो फोरेंसिक विज्ञान में यह दर्शाते हैं कि पीड़िता को दबाया गया था और वह खुद को बचाने के लिए लड़ रही थी.   
  • अंदरूनी चोट: उसकी पीठ पर “नीले निशान” थे, जो बताते हैं कि उसे किसी सख्त सतह (जैसे फर्श या दीवार) पर लंबे समय तक जोर से दबाया गया था.   
  • यौन हिंसा: शुरुआती रिपोर्टों के विपरीत, ऑटोप्सी ने उसके प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर चोटों और आंतरिक ऊतकों (tissues) को नुकसान की पुष्टि की है, और स्पष्ट किया है कि “यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता.”   
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वो सवाल जो लिखेंगे केस की पटकथा

पुलिस सूत्रों का दावा है कि जांच अब तीन विशिष्ट सवालों के जवाब तलाशने पर केंद्रित है जो अंतिम चार्जशीट तय करेंगे:

  1. घटनास्थल (PO) की पहचान: क्या हॉस्टल का कमरा ही यौन उत्पीड़न का स्थान था?
  2. नींद की दवा का रहस्य: क्या छात्रा ने नींद की गोलियां अपनी मर्जी से लीं, या हमले के बाद आत्महत्या का रूप देने की साजिश के तहत उसे जबरदस्ती खिलाई गईं?
  3. हिंसा की टाइमिंग: उसके फोन पर गूगल सर्च हिस्ट्री में जहर के बारे में खोज मिली है. बड़ा सवाल यह है: क्या उसने ये खोज हमले से पहले की (जो डिप्रेशन दर्शाता है) या हमले के बाद (जो ट्रामा और हताशा दर्शाता है)? या फिर, क्या हमलावर ने फोन के साथ छेड़छाड़ की?

आज की स्थिति में, शंभू गर्ल्स हॉस्टल को खाली करा लिया गया है. मालिक मनीष कुमार रंजन पुलिस हिरासत में हैं. हालिया छापेमारी में, एसआईटी को हॉस्टल के अंदर दरवाजों पर “आपत्तिजनक शब्द” लिखे मिले हैं और सीसीटीवी सिस्टम के डीवीआर (DVR) को जब्त कर लिया गया है.

पुलिस का दावा है कि “भूसे के ढेर में सुई” मिल चुकी है. जैसे ही ‘घटनास्थल’ पर अंतिम फोरेंसिक मुहर लगेगी, अधिकारी एक ऐसे खुलासे का वादा कर रहे हैं जो अब तक चल रही तमाम अटकलों को खत्म कर देगा.

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