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पटना के चर्चित NEET छात्रा मौत मामले में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट में छात्रा से जुड़े साक्ष्यों में पुरुष जैविक सामग्री (मेल बायोलॉजिकल एविडेंस) की पुष्टि हुई है, जिसने आत्महत्या की शुरुआती थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है और लापरवाही के आरोप में संबंधित थानाध्यक्ष (SHO) रौशनी कुमारी और जांच अधिकारी (IO) हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, FSL रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो गया है कि घटनास्थल और पीड़िता से जुड़े नमूनों में पुरुष जैविक साक्ष्य मौजूद थे। यह संकेत देता है कि घटना के समय छात्रा अकेली नहीं थी या उसके संपर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी था। अब पुलिस इस एंगल से मामले की दोबारा गहन जांच कर रही है कि क्या यह आत्महत्या थी या इसके पीछे किसी तरह की जबरदस्ती, उत्पीड़न या अपराध छिपा है।
रिपोर्ट के बाद पुलिस ने छात्रा, उसके परिजनों और करीबी दोस्तों के मोबाइल फोन भी सीज़ कर लिए हैं। इन मोबाइल डाटा की जांच के जरिए कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और लोकेशन हिस्ट्री खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि छात्रा किन लोगों के संपर्क में थी और घटना से पहले क्या कुछ हुआ था।
पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट आने के बाद जांच तेज़ हो गई है और केस ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जैविक साक्ष्य सामने आने के बाद पुलिस अब इसे सामान्य मौत नहीं, बल्कि संभावित आपराधिक घटना मानकर हर एंगल से जांच कर रही है।


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जांच एजेंसियों ने बताया कि बरामद साक्ष्यों के आधार पर अब संदिग्ध व्यक्ति का डीएनए प्रोफाइल तैयार किया जाएगा, जिससे उसकी पहचान कर घटना से जुड़े सच तक पहुंचा जा सके। इसके साथ ही छात्रा के संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ बढ़ा दी गई है और तकनीकी साक्ष्यों की भी बारीकी से जांच हो रही है।
FSL रिपोर्ट के बाद यह भी सामने आया कि शुरुआती जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया था। इसी वजह से SHO रौशनी कुमारी और IO हेमंत झा को निलंबित कर दिया गया है। उच्च अधिकारियों का कहना है कि मामले में निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी था।
अब केस की जिम्मेदारी एक विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपे जाने की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि हर एंगल से जांच हो सके और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाया जा सके।
5 जनवरी
6 जनवरी
पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि शुरुआत से ही मामले को आत्महत्या बताकर दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सही जांच होती तो आज सच्चाई पहले ही सामने आ जाती। परिवार अब सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।
परिजनों का कहना है कि FSL रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि मामला सामान्य नहीं था और इसमें किसी बड़े षड्यंत्र की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह घटना पटना समेत पूरे बिहार में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। खासकर गर्ल्स हॉस्टल्स की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उंगली उठ रही है। कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले में दोषियों को सख्त सजा देने और हॉस्टलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पुरुष जैविक साक्ष्य किसका है और वह व्यक्ति छात्रा के संपर्क में कैसे आया। डीएनए प्रोफाइलिंग के जरिए इस रहस्य से पर्दा उठाया जाएगा। साथ ही मोबाइल डाटा और CCTV फुटेज से भी कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
FSL रिपोर्ट के बाद साफ हो गया है कि यह मामला सिर्फ आत्महत्या का नहीं बल्कि कहीं अधिक गंभीर अपराध का संकेत देता है। आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
पटना का यह केस अब सिर्फ एक छात्रा की मौत का मामला नहीं रहा, बल्कि यह सिस्टम की जिम्मेदारी और युवतियों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। जनता की निगाहें अब जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या सच सामने आएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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