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पटना। बिहार की राजधानी पटना अब केवल ऐतिहासिक धरोहरों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि तेजी से कला और संस्कृति के आधुनिक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रही है। इसी कड़ी में पश्चिमी पटना के गोला रोड क्षेत्र के समीप स्थापित किया गया नया कला केंद्र “अर्थशिला” (Arthshila)शहर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उभरकर सामने आया है। निजी स्तर पर निर्मित इस केंद्र का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को मंच देना और आम लोगों को कला से जोड़ना है।



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अर्थशिला को एक ऐसे बहुआयामी कला परिसर के रूप में विकसित किया गया है, जहां चित्रकला, मूर्तिकला, हस्तशिल्प, फोटोग्राफी और समकालीन कला के विविध रूपों को प्रदर्शित किया जाएगा। यहां नियमित रूप से कला प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं, संवाद सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है, जिससे युवा कलाकारों को सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

स्थानीय कला प्रेमियों का मानना है कि अब तक पटना में ऐसे आधुनिक और समर्पित कला केंद्रों की कमी रही है। अधिकतर कलाकारों को अपने कार्यों के प्रदर्शन के लिए दिल्ली, कोलकाता या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। अर्थशिला के खुलने से यह दूरी काफी हद तक कम होगी और बिहार के कलाकारों को अपने ही शहर में पहचान मिलने का रास्ता खुलेगा।


केंद्र के स्थापत्य में आधुनिकता और पारंपरिक भारतीय कला शैली का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। खुला परिसर, प्राकृतिक रोशनी से भरपूर गैलरी हॉल और शांत वातावरण इसे कला साधना के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। यहां आगंतुक न केवल कलाकृतियों को देख सकेंगे, बल्कि कलाकारों से सीधे संवाद भी कर पाएंगे।



अर्थशिला के संस्थापकों के अनुसार, यह केंद्र केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में काम करेगा। भविष्य में यहां कला शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम, बच्चों के लिए रचनात्मक कार्यशालाएं और ग्रामीण शिल्पकारों के उत्पादों के लिए विशेष बाजार भी स्थापित करने की योजना है।

शहर के बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे पटना की पहचान एक उभरते सांस्कृतिक शहर के रूप में और मजबूत होगी। साथ ही यह पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि कला प्रेमी देश के अन्य हिस्सों से भी यहां आकर्षित होंगे।कुल मिलाकर, गोला रोड के पास बना अर्थशिला न केवल एक नया भवन है, बल्कि यह पटना के सांस्कृतिक भविष्य की एक मजबूत नींव है। निजी प्रयास से शुरू हुआ यह केंद्र आने वाले वर्षों में बिहार की कला और रचनात्मकता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है
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