सीमा कोहली और प्रो० अमरेश कुमार की रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी की शुरुआत

पटना, 9 मार्च, 2024 | बिहार संग्रहालय, पटना में आज दिनांक 09 मार्च, 2024 को दो चर्चित समकालीन कलाकारों श्रीमती सीमा कोहली और प्रो० अमरेश कुमार की रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी की शुरुआत हुई। दोनों प्रदर्शनी का उद्घाटन बिहार संग्रहालय के महानिदेशक श्री अंजनी कुमार सिंह के कर कमलों से किया गया। आयोजित प्रदर्शनियों में एक प्रदर्शनी सुप्रसिद्ध श्रीमती सीमा कोहली जो भारतीय समकालीन कलाकार, मूर्तिकार और कवि की है। दूसरी प्रदर्शनी ‘मोक्ष’ जो कि प्रो० अमरेश कुमार की है, जो राष्ट्रीय स्तर के ख्यात मूर्तिकार हैं। श्रीमती सीमा कोहली की प्रदर्शनी का शीर्षक है “सीमा कोहली : बिटवीन रियलम्स एंड ड्रीम्स अलोंग रियलिटीज एज़ वहीं मूर्तिकार प्रो० अमरेश कुमार की प्रदर्शनी का शीर्षक है “मोक्ष” । 

उद्घाटन समारोह के शुरूआत में संग्रहालय के अपर निदेशक, श्री अशोक कुमार सिन्हा ने श्री अंजनी कुमार सिंह कलाकार द्वय श्रीमती सीमा कोहली एवं प्रो० अमरेश कुमार और कार्यक्रम में उपस्थित सभी कलाप्रेमियों, कलाकारों एवं मीडियाकर्मियों का स्वागत करते हुए दोनों कलाकारों के संक्षिप्त परिचय से अवगत कराया । 

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए बिहार संग्रहालय के महानिदेशक श्री अंजनी कुमार सिंह ने कहा प्रो० अमरेश कुमार एक ऐसे चर्चित मूर्तिकार हैं जिन्होंने विगत चार दशकों में अपनी कला सक्रियता से राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की समकालीन मूर्तिकला को एक विशेष पहचान दिलाई है। ऐसे में अमरेश कुमार, जो मूलतः मूर्तिकार हैं और इन दिनों बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय से बतौर प्राध्यापक जुड़े हैं। उनकी यह रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी एक महत्वपूर्ण परिघटना के तौर पर कला प्रेमियों के समक्ष उपस्थित है। जिसका एक सिरा मौर्ययुगीन मूर्तिकला परम्परा से जुड़ता है, जो एक तरह से वर्तमान बिहार के मूर्तिकला का सर्वथा गौरवमयी और आरंभिक इतिहास है। इस तरह से देखा जाए तो यह प्रदर्शनी लगभग दो हजार वर्ष पूर्व के इतिहास का ऐसा पुनः प्रस्तुतिकरण है, जिसमें समकालीन मूर्तिकला और प्राचीन परम्परा का एकीकरण भी समाहित है। अमरेश एक ऐसे मूर्तिकार हैं जो अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम के तौर पर पत्थर, टेराकोटा, धातु और फाइबर समेत सभी प्रचलित सामग्रियों को अपनाते हैं। 

श्री अंजनी कुमार सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमती सीमा कोहली की प्रदर्शित कलाकृतियाँ सीमा कोहली के द्वारा उनके कला के प्रति समर्पण एवं उनके बहु-विषयक अभिवियक्ति को परिभाषित करती है। उनकी रचनाएँ कविता के समान उनकी कला में तीव्र भावनाओं को प्रकट करने का काम करती हैं। बिहार संग्रहालय समकालीन भारतीय कलाकारों की असाधारण कलात्मकता अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित करने एवं आम दर्शकों तक पहुचाने एवं जोड़ने के लिए समर्पित है । तीन दशकों से अधिक के अभ्यास के साथ एक स्व-प्रशिक्षित कलाकार कोहली अपनी रचनाओं के लिए पौराणिक कथाओं दर्शन प्रतिमा विज्ञान और साहित्य से प्रेरणा लेती हैं जो खोई हुई स्त्री कथा को पुनः सामने लाती हैं। 

इनकी कृतियों में सौंदर्य कामुकता और आध्यात्मिकता के विषय केंद्र स्तर पर हैं जो स्त्री को शक्ति और अस्तित्व के अंतिम स्रोत के रूप में चित्रित करते हैं। भारत में महिलाओं के खिलाफ अन्याय के बारे में बढ़ती जागरूकता के समय में उन्हें महिलाओं के जटिल और अवास्तविक चित्रणों के लिए 

 

जाना जाता है जो साहसपूर्वक स्त्री विषयकता का दावा करते हैं। सीमा कोहली का काम धर्म और आध्यात्मिकता की बहुलता का जश्न मनाता है। प्रत्येक कलाकृति में मिथकों आध्यात्मिकता और दर्शन की बहुस्तरीय कहानियाँ शामिल हैं। 

सीमा कोहली की एकल प्रदर्शनियाँ ब्रुसेल्स, मेलबर्न, लंदन, न्यूयॉर्क, दुबई, सिंगापुर, दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर में दिखाई जा चुकी हैं। उनकी कलाकृतियों को 2015 और 2014 में वेनिस बिएननेल और 2012 में बीजिंग बिएननेल में प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने 2022 में इंडिया आर्ट फेयर, 2015 में हांगकांग आर्ट फेयर, 2011 में शंघाई आर्ट फेयर में प्रदर्शन किया है। 2010 में एआरसीओ मैड्रिड और 2009 में आर्ट बेसल में भी । वह 2009 में फ्लोरेंस बिएननेल में स्वर्ण पदक, 2008 में महिलाओं के लिए ललित कला अकादेमी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और उसी वर्ष यंग फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन वूमेन अचीवर्स अवॉर्ड की प्राप्तकर्ता रही हैं। अपने संबोधन में बिहार संग्रहालय के महानिदेशक, श्री अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि यह प्रदर्शनी हमें वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल अपनी आत्मा की गहराइयों और छायाओं का पता लगाने के लिए आमंत्रित करती है। मुझे बहूत खुशी है कि बिहार संग्रहालय इन विधा, मिथकों और वास्तविकताओं में निहित कलात्मकता को आम दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है । आशा है कि दोनों प्रदर्शनियां कलाकारों एवं कलाप्रेमियों की कलात्मक अन्वेषण को प्रेरित करेंगी और कालातीत और समकालीन कला के बीच संबंध को बढ़ावा देगी।

बिहार संग्रहालय के स्थापना के समय से ही हमारी प्राथमिकता एवं प्रतिबद्धता विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समकालीन कला का संवर्द्धन भी रहा है। जिसके तहत एक ओर जहाँ देश में पहली बार म्यूजियम बिनाले जैसे आयोजन को सफलतापूर्वक साकार किया। वहीं अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों के साथ-साथ बिहार के पुरोधा कलाकारों की रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया। श्रीमती सीमा कोहली एवं प्रो० अमरेश कुमार की मौजूदा प्रदर्शनी इसी श्रृंखला की अगली कड़ी है। समारोह के अंत में धन्यवाद झापन श्री सुनील कुमार झा, उपनिदेशक, बिहार संग्रहालय ने किया ।

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