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पटना। धनतेरस के अवसर पर बिहार विधानसभा परिसर में मगही भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विधानसभा स्थित अपने कक्ष में आयोजित समारोह में ‘मगही महोत्सव 2.0’ की स्मारिका का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मगही भाषा और साहित्य से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

धनतेरस के कारण कई आमंत्रित लोग खरीदारी में व्यस्तता के चलते समारोह में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद पटना के चर्चित यूरोलॉजिस्ट डॉ. सत्यजीत, रंगकर्मी एवं लेखक मिथिलेश, गया के वरीय अधिवक्ता मुकेश तथा गया घराने की गायिकी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे पंडित सतीश शर्मा सहित कई मगही प्रेमियों ने समारोह में सहभागिता की।

लोकार्पण समारोह के दौरान मगही भाषा के वर्तमान स्वरूप, उसके विकास और उसे उचित सम्मान दिलाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि मगही जैसी समृद्ध लोकभाषा को उसकी पहचान और प्रतिष्ठा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास और सामूहिक पहल जरूरी है।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भी मगही भाषा को उचित सम्मान दिलाने की आवश्यकता पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया। उन्होंने इस दिशा में पहल करने की इच्छा जताते हुए संबंधित प्रस्ताव मांगे और स्वयं भी प्रयास करने का आश्वासन दिया।

इस मौके पर मगही भाषा के संरक्षण और उसे सम्मान दिलाने के लिए तीन साथियों—आरजे विजेता, रविशंकर उपाध्याय और उज्ज्वल—ने मिलकर अपने-अपने स्तर पर प्रयास करने का संकल्प लिया। उनका उद्देश्य मगही भाषा को उसका पहला औपचारिक सम्मान दिलाने की दिशा में सार्थक पहल करना है।
समारोह में उपस्थित लोगों ने उम्मीद जताई कि सामूहिक प्रयासों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से मगही भाषा को उसकी समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप पहचान और सम्मान मिल सकेगा।
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