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पटना: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और देश के जाने-माने उद्योगपति डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा (आर.के. सिन्हा) का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से बिहार के राजनीतिक, औद्योगिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
आर.के. सिन्हा का जीवन पत्रकारिता, राजनीति, उद्यमिता और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान का उदाहरण रहा। वे भाजपा के शुरुआती दौर से जुड़े नेताओं में शामिल थे। इसके साथ ही उन्होंने सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) ग्रुप की स्थापना कर निजी सुरक्षा सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान बनाई। पटना के एक छोटे से गैराज से शुरू हुआ उनका कारोबारी सफर देश और विदेश तक पहुंचा।
परिजनों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना लाया जाएगा। पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकेंगे। अंतिम संस्कार की विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
22 सितंबर 1951 को बिहार के भोजपुर जिले के बहियारा गांव में जन्मे आर.के. सिन्हा की प्रारंभिक शिक्षा पटना में हुई। उन्होंने राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई की। युवावस्था से ही उनकी रुचि पत्रकारिता, सामाजिक गतिविधियों और सार्वजनिक जीवन में थी।
उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की और पटना से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक द सर्चलाइट से जुड़े। पत्रकार के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं को करीब से देखा। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने युद्ध संवाददाता के रूप में रिपोर्टिंग की थी। इस अनुभव ने उनके व्यक्तित्व और राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति उनकी समझ को गहराई दी।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों और आंदोलन से वे काफी प्रभावित थे। वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान भी वे लोकतांत्रिक आंदोलन से जुड़े नेताओं और उनके परिवारों की सहायता के लिए आगे आए।
जेपी आंदोलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचय उनकी पुस्तक जन आंदोलन से भी मिलता है, जिसमें 1970 से 1975 के बीच जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन का उल्लेख किया गया है।
आर.के. सिन्हा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) ग्रुप की स्थापना और उसका विस्तार शामिल है।
वर्ष 1974 में उन्होंने पटना के एक छोटे से गैराज से SIS की शुरुआत की। उनका उद्देश्य वर्ष 1971 के युद्ध के बाद सेना से सेवानिवृत्त होकर लौटे पूर्व सैनिकों को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना था। उन्होंने महसूस किया कि सेना में प्रशिक्षित जवानों का अनुशासन, अनुभव और सुरक्षा संबंधी दक्षता निजी सुरक्षा क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
इसी सोच के साथ उन्होंने पूर्व सैनिकों को रोजगार देने की पहल की। धीरे-धीरे यह छोटा उद्यम एक बड़े व्यावसायिक समूह में बदल गया। SIS ने निजी सुरक्षा, मैनपावर, फैसिलिटी मैनेजमेंट और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में देशभर में अपनी पहचान बनाई। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में भी अपना विस्तार किया।
आज SIS देश की प्रमुख निजी सुरक्षा सेवा कंपनियों में गिनी जाती है। हजारों लोगों को रोजगार देने वाली इस संस्था की सफलता आर.के. सिन्हा की उद्यमशीलता और दूरदर्शिता का प्रमाण मानी जाती है।
राजनीतिक जीवन में भी आर.के. सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे भारतीय जनसंघ से जुड़े रहे और वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद इसके शुरुआती सदस्यों में शामिल हुए। बिहार में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार में भी उन्होंने योगदान दिया।
वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा। वे 10 अप्रैल 2014 से 9 अप्रैल 2020 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने संसद में बिहार और देश से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया।
अपने संसदीय कार्यकाल में उन्होंने महिला सुरक्षा, गंगा की स्वच्छता, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और बिहार के विकास जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी जुड़े रहे।
पत्रकारिता से अपने पुराने जुड़ाव को उन्होंने राजनीतिक और कारोबारी जीवन में भी बनाए रखा। वर्ष 2016 से 2022 तक उन्होंने बहुभाषी समाचार एजेंसी हिंदुस्थान समाचार के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
मीडिया, सार्वजनिक संवाद और समाचारों के प्रसार के प्रति उनकी रुचि उनके पूरे सार्वजनिक जीवन में दिखाई देती रही।
इसके अलावा वे विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे। पूर्व सैनिकों के पुनर्वास और रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
आर.के. सिन्हा के निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए पत्रकारिता, समाजसेवा और राजनीतिक क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उनके उद्यमशील सफर और भाजपा के प्रति उनके योगदान को स्मरण किया।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं रविशंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी सहित कई नेताओं ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
आर.के. सिन्हा का जीवन संघर्ष, संकल्प और उद्यमशीलता की एक प्रेरक कहानी रहा। एक पत्रकार के रूप में 1971 के युद्ध की रिपोर्टिंग से शुरुआत करने वाले आर.के. सिन्हा ने जेपी आंदोलन को करीब से देखा, भाजपा के शुरुआती दौर में सक्रिय भूमिका निभाई और पटना से एक ऐसी कंपनी की नींव रखी, जिसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
बिहार के लिए उनका विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि SIS ग्रुप की शुरुआत पटना से हुई और यहीं से इसका विस्तार देश-दुनिया तक पहुंचा।
वे अपने पीछे पत्नी रीता किशोर सिन्हा, पुत्र ऋतुराज किशोर सिन्हा और पुत्री रिवोली सिन्हा को छोड़ गए हैं।
आर.के. सिन्हा के निधन से बिहार ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने पत्रकारिता, राजनीति, उद्योग और रोजगार सृजन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके द्वारा स्थापित संस्थान और उनके कार्य सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की याद दिलाते रहेंगे।
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