दलान संस्था की दो दिवसीय ‘ग्रीष्म छायांकन कार्यशाला’ का “आयोजन” विशेषज्ञों ने साझा की आधुनिक फोटोग्राफी की बारीकियां

पटना, संवाददाता।
छायांकन केवल एक पेशा नहीं, बल्कि कला, सौंदर्यशास्त्र और तकनीक का अद्भुत संगम है। बदलते डिजिटल दौर में कैमरा तकनीक में लगातार हो रहे नवाचारों ने फोटोग्राफी के क्षेत्र को नई दिशा प्रदान की है। इन्हीं आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक ज्ञान से प्रतिभागियों को परिचित कराने के उद्देश्य से दलान संस्था द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘ग्रीष्म छायांकन कार्यशाला’ का “आयोजन” किया गया।”कोई भी रचनात्मकता हमें मनुष्यता की ओर ले जाती है” हमारे अंदर छिपे मनोभावों को स्पष्ट और विविध रूप से प्रकट करने और समाज में संप्रेषित करने के लिए विभिन्न कला माध्यम उपलब्ध हैं। उक्त विचार कला एवं शिल्प महाविद्यालय के प्राध्यापक व पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय पांडेय ने शनिवार को व्यक्त किया।

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर दलान संस्था के संस्थापक प्रशांत रवि ने कहा कि डिजिटल युग में छायांकन की दुनिया तेजी से बदल रही है। हर वर्ष नई तकनीकें और उपकरण इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे फोटोग्राफी के स्वरूप और संभावनाओं में व्यापक परिवर्तन आया है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक छायांकन तकनीकों, उपकरणों के उपयोग तथा पेशेवर चुनौतियों से अवगत कराना है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के आयोजन में कैमरा निर्माता कंपनी निकॉन का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है। कंपनी की ओर से आधुनिक कैमरा उपकरणों के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी उपलब्ध कराया गया है, जो प्रतिभागियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान करेंगे।

कार्यशाला के पहले दिन आयोजित प्रथम सत्र में निकॉन के विशेषज्ञ मयुरेश सिन्हा ने कैमरे की तकनीकी बारीकियों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को कैमरे के विभिन्न मोड, एक्सपोजर, शटर स्पीड, एपर्चर, आईएसओ तथा आधुनिक डिजिटल कैमरों की नवीनतम सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी दृश्य को प्रभावशाली ढंग से कैद करने के लिए तकनीकी समझ और रचनात्मक दृष्टिकोण दोनों का समान महत्व है।

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दूसरे सत्र में वरिष्ठ छायाकार सुमन श्रीवास्तव ने प्रकाश संयोजन (लाइटिंग) और फोटो संपादन की व्यावहारिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि उचित प्रकाश व्यवस्था किसी भी तस्वीर की गुणवत्ता और प्रभाव को किस प्रकार बढ़ा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने आधुनिक फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर के उपयोग और पोस्ट-प्रोसेसिंग की विभिन्न विधियों पर भी प्रकाश डाला।

आयोजकों के अनुसार दो दिवसीय इस कार्यशाला में कुल आठ सत्र आयोजित किए । इनमें अधिकांश सत्र प्रदर्शन आधारित और प्रायोगिक होंगे, ताकि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव भी प्राप्त हो सके। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों के लिए एक विशेष फील्ड विजिट का भी आयोजन किया गया है, जहां वे वास्तविक वातावरण में छायांकन का अभ्यास करेंगे।

उद्घाटन सत्र में फिल्मकार प्रशांत रंजन, शिक्षाविद डॉ. गौतम कुमार, मुदस्सिर सिद्दीकी, वरिष्ठ छायाकार सुमन श्रीवास्तव, डॉ. नीरज कृष्ण सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए छात्र-छात्राएं एवं छायांकन में रुचि रखने वाले प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को रचनात्मकता, तकनीकी दक्षता और निरंतर अभ्यास के महत्व पर भी बल दिया।

कार्यशाला के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को छायांकन के क्षेत्र में नए अवसरों और आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में इस क्षेत्र में सफल करियर की दिशा में आगे बढ़ सकें।

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