Global media Update tech Update & Automobile Life Style & Entertainment

पटना, 5 अक्टूबर 2026। जागरण फिल्म फेस्टिवल के पटना चैप्टर में रविवार, 4 अक्टूबर की शाम भोजपुरी फिल्म ‘बोध’ का प्रदर्शन बतौर क्लोजिंग फिल्म किया गया। पटना के कुरजी स्थित पीएंडएम मॉल के सिनेपोलिस के ऑडिटोरियम-4 में रात आठ बजे आयोजित इस विशेष स्क्रीनिंग को लेकर फिल्म की पूरी टीम उत्साहित थी। हालांकि टीम ने जितनी संख्या में दर्शकों के आने का अनुमान लगाया था, वास्तविक स्थिति उससे कहीं अधिक उत्साहजनक रही। फिल्म देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे और ऑडिटोरियम की सीटें कम पड़ गईं।



फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो पूरी टीम के लिए लंबे समय तक यादगार रहने वाला है। दर्शकों को सीटें नहीं मिलने पर कई लोगों ने ऑडिटोरियम की सीढ़ियों पर बैठकर फिल्म देखी। खास बात यह रही कि फिल्म की अपनी कास्ट और टेक्निकल टीम के कुछ सदस्यों ने भी सीढ़ियों पर बैठकर दर्शकों के साथ इस विशेष पल को साझा किया। फिल्म की टीम के अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि ऑडिटोरियम की लगभग 70 से 80 प्रतिशत सीटें उनके परिचितों और समर्थकों से भरेंगी, लेकिन बड़ी संख्या में आम सिनेमा प्रेमियों के पहुंचने से पूरा माहौल उत्सव जैसा हो गया।


‘बोध’ का निर्देशन प्रशांत रंजन ने किया है। फिल्म का निर्माण Trinetra Cinematics के बैनर तले किया गया है। प्रशांत रवि फिल्म के को-प्रोड्यूसर और क्रिएटिव डायरेक्टर भी हैं। इसकी कहानी रिश्तों, समाज, मानवीय संवेदनाओं और आत्ममंथन जैसे विषयों से जुड़ी हुई है।लेखन, निर्माण एवं निर्देशन:
प्रशांत रंजन
संगीत:सीताराम सिंह /गीत:डॉ. प्रणव पराग /डीओपी एवं संपादन:पृथ्वी राज
सह-निर्माता:अनुपमा, प्रशांत रवि, रोहित चंद्रा, प्रभात रंजन शाही
कलाकार:
गरिमा मिश्रा | नीरज कृष्णा | अनिल मिश्रा | रचना सिंह | डॉ. शुभाष कृष्णा
डॉ. गौतम कुमार | रविकांत सिंह | कुणाल रंजन | शुभम दुबे | आदर्श कुमार
अभिषेक तिवारी | संगीता पांडेय | पल्लवी पल्लट | शिवांगी | पंखुरी सिंह
फिल्म की विषय-वस्तु को कोरोना महामारी के दौर की त्रासदी और उसके सामाजिक एवं मानसिक प्रभावों की पृष्ठभूमि में बुना गया है। कहानी एक भौतिकी के प्रोफेसर की महत्वाकांक्षी सोच, उनके सपनों और उन सपनों के परिणामों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन, एकांतवास और सामाजिक दूरी ने लोगों के जीवन को जिस तरह प्रभावित किया, फिल्म उसी अनुभव को मानवीय संवेदनाओं के साथ पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।
‘बोध’ की खासियत यह है कि यह महामारी को केवल एक स्वास्थ्य संकट के रूप में नहीं देखती, बल्कि उसके कारण पैदा हुई मानसिक उथल-पुथल, अकेलेपन, ऊब, असुरक्षा और रिश्तों में आए बदलावों को भी कहानी का हिस्सा बनाती है। फिल्म के कई दृश्य दर्शकों को असहज या विचलित कर सकते हैं। इसका कारण यह है कि एकांतवास के दौरान पैदा होने वाली नीरसता और मानसिक जद्दोजहद को निर्देशक ने संवेदनशीलता के साथ चित्रित करने का प्रयास किया है।

फिल्म में महामारी के दौरान मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष को भी प्रमुखता दी गई है। बंद कमरों में बीतता समय, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और सामान्य जीवन के अचानक रुक जाने की स्थिति व्यक्ति के सोचने और रिश्तों को देखने के नजरिये को बदल देती है। ‘बोध’ इसी बदलाव और आत्ममंथन को अपनी कथा के केंद्र में रखती है।
जागरण फिल्म फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंच पर भोजपुरी फिल्म का क्लोजिंग फिल्म के तौर पर प्रदर्शित होना क्षेत्रीय सिनेमा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इस स्क्रीनिंग ने यह संकेत दिया कि भोजपुरी भाषा में बनी फिल्मों की विषय-वस्तु और प्रस्तुति को व्यापक दर्शक वर्ग के सामने लाने की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद दर्शकों की मौजूदगी और उत्साह ने पूरी टीम का मनोबल बढ़ाया। जिन दर्शकों के लिए ऑडिटोरियम की सीटें पर्याप्त नहीं रहीं, उनका सीढ़ियों पर बैठकर फिल्म देखना इस शाम को ‘बोध’ की टीम के लिए एक यादगार सिनेमाई अनुभव बना गया। महामारी जैसे कठिन दौर की कहानी कहने वाली इस फिल्म को पटना के दर्शकों से मिला यह अप्रत्याशित प्रतिसाद निश्चित रूप से फिल्म की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया।
Auto Amazon Links: No products found.