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स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल पर लिवर प्रत्यारोपण के लिए बिहार सरकार ने उपलब्ध कराया 15 लाख रुपये का अनुदान
पटना, 05 नवंबर 2026। बिहार में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य में पहली बार बिहार सरकार की आर्थिक सहायता से लिवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया है। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में 19 वर्षीय युवती का सफल लिवर प्रत्यारोपण किया गया। इस उपचार के लिए बिहार सरकार की ओर से 15 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल और पूर्व घोषित सरकारी निर्णय के अनुरूप यह सहायता प्रदान की गई। इस उपलब्धि के साथ राज्य में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पहलू 16 वर्षीय मोनू कुमार का अंगदान है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मोनू को IGIMS, पटना में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उपचार के दौरान उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इस असहनीय दुख की घड़ी में उनके परिजनों ने असाधारण साहस, संवेदनशीलता और मानवता का परिचय देते हुए मोनू के लिवर तथा दोनों किडनी दान करने का निर्णय लिया। परिवार के इस फैसले ने एक किशोर की असमय मृत्यु को तीन जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद में बदल दिया।
मोनू कुमार के अंगदान से तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला है। IGIMS, पटना में 19 वर्षीय युवती का सफल लिवर प्रत्यारोपण किया गया। इसके अतिरिक्त एक अन्य मरीज का किडनी प्रत्यारोपण IGIMS में किया गया, जबकि तीसरे मरीज का किडनी प्रत्यारोपण अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), पटना में संपन्न हुआ।
अंग प्रत्यारोपण की यह प्रक्रिया चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का भी उदाहरण है। एक ब्रेन डेड मरीज के अंगदान से तीन गंभीर मरीजों को जीवन की नई संभावना मिली। मोनू कुमार के परिजनों का यह निर्णय उन परिवारों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने किसी प्रियजन के असमय निधन की स्थिति में अंगदान के माध्यम से दूसरों की जिंदगी बचाने का विकल्प चुन सकते हैं।
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने IGIMS, पटना के निदेशक तथा लिवर प्रत्यारोपण विभाग के विभागाध्यक्ष को अंगदान एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में होने वाले सभी आवश्यक खर्चों की व्यवस्था करने को कहा।
इसके साथ ही, पूर्व घोषित निर्णय के अनुरूप लिवर प्रत्यारोपण के लिए बिहार सरकार की ओर से प्रति मरीज 15 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। सरकार की इस पहल से गंभीर बीमारी के उपचार में आर्थिक सहायता की आवश्यकता वाले मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य मंत्री की पहल को राज्य में अंग प्रत्यारोपण की सुविधा के विस्तार और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों तक जीवनरक्षक उपचार पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लिवर प्रत्यारोपण जैसी जटिल और महंगी चिकित्सा प्रक्रिया के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध होना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

बिहार सरकार का उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी जरूरतमंद मरीज को जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधाओं से वंचित नहीं होने देना है। सरकारी सहायता से लिवर प्रत्यारोपण का सफल होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
लिवर प्रत्यारोपण गंभीर अवस्था में पहुंच चुके मरीजों के लिए जीवन बचाने वाला उपचार है। हालांकि, इसकी जटिलता और अधिक खर्च के कारण कई मरीजों के लिए यह उपचार कराना कठिन हो जाता है। ऐसे में सरकारी अनुदान की व्यवस्था जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
राज्य में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाओं के विकास के साथ-साथ अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन डेथ की स्थिति में निर्धारित चिकित्सकीय और कानूनी प्रक्रिया के तहत अंगदान से कई जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती है। मोनू कुमार के मामले ने इस संदेश को और मजबूत किया है कि अंगदान किसी दूसरे परिवार के लिए जीवन की नई शुरुआत बन सकता है।
अंगदान और प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में कई संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। IGIMS की ब्रेन डेथ कमेटी, स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO), बिहार, नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO), दिल्ली तथा रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (ROTTO), कोलकाता के समन्वय से यह प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके अतिरिक्त IGIMS और AIIMS, पटना की चिकित्सकीय टीमों ने अंग प्रत्यारोपण को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ब्रेन डेथ की पुष्टि, अंगदान की सहमति, अंगों के आवंटन और प्रत्यारोपण जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं में संबंधित संस्थानों के बीच समन्वय आवश्यक होता है। इस मामले में चिकित्सकीय टीमों और संबंधित संस्थानों के सहयोग से तीन मरीजों का सफल प्रत्यारोपण संभव हो सका।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने इस पुनीत कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाली पूरी चिकित्सकीय टीम को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने IGIMS और AIIMS, पटना के चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा अंग प्रत्यारोपण से जुड़े सभी संस्थानों के योगदान की सराहना की।
स्वास्थ्य मंत्री ने मोनू कुमार के परिजनों के साहसिक, संवेदनशील और मानवता से परिपूर्ण निर्णय के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपने प्रियजन को खोने के असहनीय दुख के बीच अंगदान का निर्णय लेना अत्यंत साहसपूर्ण कार्य है। मोनू के परिजनों ने अपने इस निर्णय से तीन जरूरतमंद परिवारों को नई उम्मीद दी है।
उन्होंने अंगदान को महादान बताते हुए कहा कि एक व्यक्ति का अंगदान कई जिंदगियों को नई उम्मीद दे सकता है। मोनू कुमार का महादान समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। यह संदेश देता है कि दुख की सबसे कठिन घड़ी में भी मानवता की सेवा का संकल्प अनेक परिवारों में खुशियां लौटा सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिवंगत मोनू कुमार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
बिहार में सरकारी सहायता से लिवर प्रत्यारोपण की यह पहली सफल उपलब्धि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अंगदान के प्रति जागरूकता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों से आने वाले समय में और अधिक मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मोनू कुमार का महादान मानवता, संवेदना और जीवन बचाने के संकल्प का अमिट उदाहरण बन गया है।
स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार ने अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा जरूरतमंद मरीजों को आधुनिक एवं जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
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