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पटना, 14 अक्टूबर 2026। पटना वीमेंस कॉलेज (स्वायत्त), पटना में नवरात्रि के पावन अवसर पर बुधवार को रंगारंग डांडिया नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उत्साह, उमंग और पारंपरिक संस्कृति से सराबोर इस कार्यक्रम में छात्राओं ने अपनी नृत्य प्रतिभा, रचनात्मकता और सामूहिक तालमेल का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में चयनित नौ समूहों ने हिस्सा लिया और आकर्षक प्रस्तुतियों से पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम के दौरान संगीत, नृत्य और पारंपरिक परिधानों के रंगों ने नवरात्रि के उल्लास को और भी खास बना दिया।


पटना वीमेंस कॉलेज में आयोजित डांडिया डांस प्रतियोगिता 2026 का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना तथा उनकी कलात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना था। प्रतियोगिता में शामिल समूहों ने लोकप्रिय नवरात्रि गीतों की धुन पर मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इनमें ‘घूमे रे घूमे’, ‘ढोली तारो’ और ‘नगाड़ा संग ढोल’ जैसे लोकप्रिय गीत शामिल रहे। इन गीतों की लय पर छात्राओं ने आकर्षक डांडिया नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।

प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं की ऊर्जा, भाव-भंगिमाओं, रंग-बिरंगे परिधानों और नृत्य संयोजन ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। सभी समूहों ने अपनी प्रस्तुतियों में रचनात्मकता, अनुशासन और टीम वर्क का परिचय दिया। नवरात्रि से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं को नृत्य के माध्यम से जीवंत करने के साथ-साथ छात्राओं ने भारतीय लोक संस्कृति के प्रति अपनी रुचि और सम्मान भी प्रदर्शित किया।
डांडिया नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. जरीन फातिमा, हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार धनंजय तथा बीसीए विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. अमृता प्रकाश शामिल थे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन भाव-भंगिमाओं, वेशभूषा, नृत्य संयोजन और समूह के बीच तालमेल जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर किया।


प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी समूहों ने अपनी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने के लिए विशेष तैयारी की थी। नृत्य की लय, एकरूपता और पारंपरिक अंदाज ने निर्णायकों के सामने प्रतिभागियों की प्रतिभा को प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता के बाद डॉ. कुमार धनंजय ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने छात्राओं के उत्साह, समर्पण और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं के महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में सामूहिक भावना, रचनात्मकता और सांस्कृतिक जागरूकता को प्रोत्साहित करते हैं।

प्रतियोगिता के परिणाम घोषित होने के बाद पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कॉलेज की डीन, एजुकेशन डॉ. सिस्टर एम. सरोज ए.सी. ने विजेता समूहों को सम्मानित किया और उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की।
प्रतियोगिता में कोड संख्या 06 के निशा एंड ग्रुप ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। वहीं, कोड संख्या 09 के रिया एंड ग्रुप को द्वितीय पुरस्कार तथा कोड संख्या 04 के यशिका एंड ग्रुप को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विजेता समूहों की उपलब्धि पर उपस्थित छात्राओं और आयोजकों ने प्रसन्नता व्यक्त की।

पुरस्कार वितरण के दौरान प्रतिभागियों के उत्साह और मेहनत की सराहना की गई। कार्यक्रम ने छात्राओं को प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ एक-दूसरे की प्रतिभा का सम्मान करने और सामूहिक रूप से सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दिया।

इस कार्यक्रम का आयोजन पटना वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सिस्टर एम. तनिषा ए.सी. और उपप्राचार्या डॉ. सिस्टर सेलिन क्रास्टा ए.सी. के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में सांस्कृतिक समन्वयकों सुश्री एनाक्षी डे बिस्वास, सुश्री पूजा कुमारी और सुश्री कृति रानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का संचालन छात्र परिषद 2026-27 की प्रीमियर समीक्षा राज और संयुक्त महासचिव वैष्णवी श्रीवास्तव ने किया। अंत में छात्र परिषद की संयुक्त महासचिव अलीबा नदीम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद कॉलेज परिसर में डांडिया डे का आयोजन भी किया गया। इस दौरान छात्राओं ने संगीत और नृत्य के साथ नवरात्रि के उत्सव का आनंद लिया। प्रतियोगिता के बाद आयोजित इस सांस्कृतिक उत्सव ने कार्यक्रम की रौनक को और बढ़ा दिया तथा छात्राओं को पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से एक साथ जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
पूरे आयोजन ने भारतीय संस्कृति, पारंपरिक नृत्य और छात्राओं की रचनात्मक प्रतिभा का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। पटना वीमेंस कॉलेज की यह पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम का समापन उल्लास, आपसी सौहार्द और नवरात्रि की उत्सवी भावना के साथ हुआ।
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