ट्रॉमा सेंटरों के सुदृढ़ीकरण के लिए विभाग प्रतिबद्ध


सड़क सुरक्षा एवं आकस्मिक सेवाओं को मजबूत बनाने पर राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित
पटना। राज्य में सड़क सुरक्षा एवं आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बापू टावर सभागार में एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। राज्य स्वास्थ्य समिति और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन एवं विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासी पदाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार सभी ट्रॉमा सेंटरों को सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशानुसार राज्य के सभी ट्रॉमा सेंटरों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत अगले 15 दिनों के भीतर सभी क्षेत्रों में ट्रॉमा सेंटरों का गैप असेसमेंट कराया जाएगा और उसकी रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को सौंपी जाएगी।


उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के मामलों में रेफरल व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। साथ ही राज्यभर में संचालित निजी एंबुलेंस सेवाओं की मैपिंग भी कराई जाएगी, जिससे आपातकालीन स्थिति में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।


कार्यशाला की अध्यक्षता एवं संचालन कर रहे राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार सिन्हा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का जीवन बचाना सबसे बड़ा दायित्व है। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य में आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाना है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर उपचार मिल सके।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) मोहम्मद अली अंसारी ने कहा कि सड़क हादसों में कमी लाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने दुर्घटना पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे की प्रक्रिया को तेज करने पर बल दिया तथा सभी ट्रॉमा सेंटरों की अद्यतन जानकारी जिला स्तर के पुलिस अधिकारियों के साथ साझा करने की बात कही।

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मुख्य प्रशिक्षक एवं पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. हिमांशु भूषण ने कहा कि जिला स्तर पर एंबुलेंस की रिस्पांस टाइम की नियमित निगरानी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज को यह विश्वास होना चाहिए कि आपात स्थिति में उसे त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा। इसके लिए एमबीबीएस चिकित्सकों को इमरजेंसी मेडिसिन से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है।


कार्यशाला के दौरान राज्य भव्या टीम के सदस्यों ने इमरजेंसी एवं रेफरल मामलों की भव्या प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग की प्रक्रिया की जानकारी दी। वहीं प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का जवाब भी विशेषज्ञों द्वारा दिया गया। कार्यक्रम के अंत में एनक्वास का राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रमाणीकरण प्राप्त करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

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