प्रांगण पटना की प्रस्तुति पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के चौथे दिन “रंगीन रुमाल”और”कपास के फूल”की प्रस्तुति

कालिदास रंगालय में चल रहे कला संस्कृति एवं युवा विभाग भारत सरकार एवं बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित प्रांगण पटना की प्रस्तुति पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2024 के चौथे दिन (5 फरवरी) नाट्यभूमि, अगरतला (त्रिपुरा) की प्रस्तुति रंगीन रुमाल (बंगला)
नाटककार एवं निर्देशक संजॉय कार

कथासार
शेक्सपियर के विश्व-प्रसिद्ध नाटक ‘ऑथेलो” से प्रेरित यह नाटक जाति-प्रथा की विडंबनाओं और उसके द्वंद्वों पर तो चोट करता ही है। नाटक के पुनर्लेखन के दौरान बंगाल और त्रिपुरा के आपसी सियासी जातीय खींचतान और पारम्परिक विद्वेषों की पृष्ठभूमि में इसे समसामयिक बनाने का प्रयत्न भी किया गया है। इसमें परस्पर सार्वभौम प्रेम के केन्द्रीय तत्व के इर्द-गिर्द घृणा, ईष्या, निर्ममता और छुआछूल के बदलते आयामों के साथ नए विकल्प की तरफ बढ़ने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा सकता है।

मंच पर
बूढ़ी औरत / देवलीना की दोस्तः आयुष्मिता चक्रबर्ती, मछुआरा /गार्ड / सैनिकः नृपेन्द्र सरकार, मछुआरा / कोर्टकर्मी / सैनिक चंद्रसता कार/चिरंजीत घोष, मछुआरा / कोर्टकर्मी / सैनिकः जॉयशंकर भट्टाचार्जी, रुद्रनारायण / सैनिक तन्दन वर्मन, रूपेंद्र कुमार तुहिन शुभ्र मट्टाचार्जी / विष्णुपद तकनर्ती, केशवलाल वेबरपीत बकरूर्ती, अघोरी: सनि सरकार, प्रियंका अनन्या घोष / संबंतिका दत्ता रॉय / अंतरा पॉल, डालिया जेसिका सरकार / निकिता चक्रब्ती, अतुल चंद्रा उत्तम दास, देबलीना अनन्या सरकार / नबनिता रॉय ।
नेपथ्य
संगीत शुभदीप गुहा, मंच विन्यास व प्रकाश परिकल्पना प्रमितांशु दास, प्रकाश संचालन रिनटोन रॉय, ध्वनि संचलन अनन्या घोष देबर्पित चक्रवर्ती/ चंद्रसंता कार, बस्त्र विन्यास: सुप्रीति घोष चंद्रसंता कार विशेष वस्त्र विन्यासः दीपक है, रूप सज्जा: पीजूष कान्ति रॉय नृत्य संरचना डॉ. देवज्योति लस्कर ।

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कालिदास रंगालय के मुख्य मंच पर दूसरी प्रस्तुति
काईट एक्टिंग स्टूडियो, मुंबई की कपास के फूल
लेखक एवं निर्देशक साहेब नितीश

कथासार
यह नाटक 1947 में हुए भारत पकिस्तान के बंटवारे पर आधारित है। माई ताजो अपने पति रहीम के साथ हिन्दुस्तान के किसी कोने में रह रही है। वह गाँव की सबसे बूढी औरत है। हर व्यक्ति माई का सम्मान करता है, सिवाय उसके 3 बेटों के, जो उसे छोड़ कर शहर में आजीविका के लिए जा बसे हैं और उसके बाद फिर कभी उसकी तरफ मुड़ कर नहीं देखते हैं। चंदर की बेटी राधा माई के बेहद करीब है, और रोज उसे खाना और लस्सी लाकर देती है। सारे लोग आपस में हिल-मिलकर खुशी-खुशी रह रहे थे, किसी को किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं थी। तभी मुल्क के बँटवारे की खबर आती है और एकाएक सारे लोग आपस में बंट जाते हैं। देखते ही देखते आपस का प्यार नफरत में बदल जाता है और सब एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। कुछ मौका परस्त लोग इस परिस्थिति का पूरा फायदा उठाने के लिए लोगों को धर्म-जाति के नाम पर उकसाने का प्रयास करते हैं। चंदर, अपने माई महावीर पिता रघुबर और दोस्त तनवीर के साथ मिलकर बलवे को टालने की पूरी कोशिश करता है, लेकिन अंततः विफल हो जाता है। नाटक में प्रेम, अमन, भाईचारे एवं एकता के महत्व को दिखाने का प्रयास किया गया है। यह नाटक पूर्णतः काल्पनिक है एवं किसी व्यक्ति, धर्म, जाति, संप्रदाय या समाज से किसी भी प्रकार की समानता केवल संगोग मात्र है।
मंच पर
माई ताजो : अंकिता दुबे, चंदर : साहेब नितीश, राधा: करिश्मा शर्मा, रहीम चाचा: करण ठाकुर, महाबीर: आर्यन मिश्रा, रघुबर: अभिराजा बडने, बनवारी तनुज उपाध्याय, तनवीर शुभम विश्वास, बलराम सिंह अभिषेक पाठक, अनवर पठानः अनिल रागां, जनक सिंह: संतोष मंडल, वारिस अली शोहराय, अन्य मीनाक्षी शर्मा, गौतम दां।

नेपथ्य
प्रकाश संचालन अर्जुन ठाकुर, संगीत संचालन: पंकज गौतम ।

आज नुक्कड़ मंच पर मिथिला संस्कृति कला मंच पटना द्वारा परम्परा हाट पर का मंचन हुआ इसके लेखक एवं परिकल्प आदर्श वैभव और निर्देशन नितेश कुमार दूसरी प्रस्तुति रंग उमंग, पटना की क्यों करें हम कंप्रोमाइज लेखक एवं निर्देशक सत्य प्रकाश। कहानी कल्प सृजन, मालदा (पश्चिम बंगाल) के निशित मंडल की प्रस्तुति
लाइन एक्टिंग

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