“पटना में रघु राय को श्रद्धांजलि, “इंसान ही उनकी फोटोग्राफी का केंद्र था”

पटना। देश के महान छायाकार रघु राय को याद करते हुए राजधानी पटना में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। दालान संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कला, संस्कृति, पत्रकारिता और फोटोग्राफी जगत से जुड़े अनेक लोगों ने भाग लेकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने रघु राय के व्यक्तित्व, उनकी कार्यशैली और भारतीय फोटोग्राफी पर उनके अमिट प्रभाव को विस्तार से याद किया।

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बापू टावर के निदेशक एवं आईएएस अधिकारी विनय कुमार ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि रघु राय की तस्वीरों के केंद्र में हमेशा “इंसान” रहा। उन्होंने कहा, “ऐसा शायद ही कोई फ्रेम होगा जिसमें इंसान न हो। उनकी फोटोग्राफी सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि मानव जीवन की कहानी कहती थी।” विनय कुमार ने यह भी कहा कि उनके निधन से भारतीय फोटोग्राफी जगत में एक ऐसा शून्य उत्पन्न हुआ है, जिसकी भरपाई कर पाना बेहद कठिन होगा।

अपने संबोधन में विनय कुमार ने रघु राय के साथ बिताए व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि रघु राय स्वभाव से अत्यंत विनोदी थे और साधारण से साधारण विषय को भी रोचक ढंग से प्रस्तुत करने की अद्भुत क्षमता रखते थे। वे नए लोगों के साथ काम करने को लेकर हमेशा उत्साहित रहते थे और कभी भी किसी जूनियर को अपने से कमतर महसूस नहीं होने देते थे। यह उनकी सबसे बड़ी मानवीय विशेषताओं में से एक थी।

उन्होंने आगे बताया कि रघु राय ने बिहार सरकार के लिए “बिहार पास्ट एंड नाउ” शीर्षक से एक महत्वपूर्ण कॉफी टेबल बुक तैयार की थी। इस पुस्तक का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया गया था। विनय कुमार ने कहा कि इस अवसर पर रघु राय ने अपने साथ काम करने वाले सभी लोगों को आमंत्रित किया था, जो उनके सहयोगी स्वभाव को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में महात्मा गांधी के योगदान पर एक और कॉफी टेबल बुक तैयार करने की योजना पर भी उनके साथ चर्चा चल रही थी, लेकिन उनका अचानक निधन इस योजना को अधूरा छोड़ गया।

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कार्यक्रम में वरिष्ठ छायाकार बी.के. जैन ने रघु राय की फोटोग्राफी की तकनीकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रघु राय की तस्वीरों में श्याम-श्वेत (ब्लैक एंड व्हाइट) का विशेष प्रभाव देखने को मिलता था। वे 400 एएसए फिल्म पर काम करना पसंद करते थे और डार्करूम में “पुश-पुल” तकनीक का उपयोग कर बेहद बारीक ग्रेन और गहराई प्राप्त करते थे। जैन ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि रघु राय के साथ काम करने के दौरान उन्हें कई अवसर मिले, जिनमें एक बार रघु राय से अपना ट्राइपॉड साझा किया, जो उनके लिए सुखद अनुभव था।
वरिष्ठ छायाकार सुमन श्रीवास्तव ने भी रघु राय की कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां सामान्य फोटोग्राफर तकनीकी पहलुओं—जैसे शैडो, आईएसओ, शटर स्पीड और ग्रेन—में उलझे रहते हैं, वहीं रघु राय ने इन सभी जटिलताओं के बीच एक सरल और प्रभावी मार्ग खोजा। उन्होंने कहा कि रघु राय ने अपनी कला से यह सिद्ध किया कि फोटोग्राफी में सबसे महत्वपूर्ण तत्व “इंसान” है, तकनीक उसके बाद आती है। यही दृष्टिकोण उन्हें महान बनाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्ध होता है।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे दालान संस्था के संस्थापक प्रशांत रवि ने संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दालान साहित्य, सिनेमा, पत्रकारिता और लोक कला जैसे विभिन्न विषयों पर लगातार कार्यक्रम आयोजित करती रही है। उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को रघु राय के निधन के तुरंत बाद ही संस्था ने उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का निर्णय लिया था, जो अब साकार हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित लोगों ने रघु राय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उनके जीवन और कार्यों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई, जिसे दर्शकों ने गहरी संवेदनाओं के साथ देखा।

इस श्रद्धांजलि सभा में कला एवं संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक डॉ. अजय कुमार सिंह, प्रसिद्ध फिल्म विश्लेषक प्रो. जय देव, फिल्मकार प्रशांत रंजन, वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ तिवारी, प्रमोद कुमार सिंह, संजीव कुमार, फोटोग्राफर प्रमोद जैन, मनीष सिन्हा, मनीष कुमार, रवि साहनी और लेखक उत्पल कुमार सहित बड़ी संख्या में शहर के फोटोग्राफर, सिनेमैटोग्र्राफर, पत्रकार, लेखक और कला प्रेमी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि रघु राय का योगदान भारतीय फोटोग्राफी के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। उनकी तस्वीरें न केवल दृश्यात्मक सौंदर्य का उदाहरण हैं, बल्कि वे समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज भी हैं। उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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