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पटना। टीबी मुक्त भारत अभियान में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद पटना जिला स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही तय होने लगी है। जिले में लक्ष्य के मुकाबले महज 3 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग होने पर सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने कड़ा रुख अपनाते हुए गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. रजनीश चौधरी और जिला स्वास्थ्य समिति की जिला योजना समन्वयक सह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की नोडल पदाधिकारी नमिता मिश्रा को अंतिम चेतावनी जारी की है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि कार्यशैली में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो दोनों अधिकारियों के विरुद्ध वरीय अधिकारियों को प्रतिवेदन भेजकर आगे की कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
सिविल सर्जन ने कहा कि मुख्य सचिव एवं जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पटना जिले का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक पाया गया। 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू होने के लगभग एक माह बाद भी जिले में निर्धारित लक्ष्य का मात्र 3 प्रतिशत स्क्रीनिंग होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। समीक्षा में यह भी सामने आया कि अभियान के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई और नियमित रूप से प्रगति प्रतिवेदन भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
सिविल सर्जन ने जिला योजना समन्वयक नमिता मिश्रा की कार्यशैली पर भी कड़ी नाराजगी जताई है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के दौरान स्क्रीनिंग की प्रगति और अनुश्रवण के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने अनभिज्ञता व्यक्त की, जिसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की उदासीनता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और इसे सेवा दायित्वों के प्रति लापरवाही माना जाएगा।
दोनों अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि प्रतिदिन शाम 6 बजे तक अभियान की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए तथा अभियान की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
सिविल सर्जन ने सभी प्रखंडों में माइक्रोप्लान तैयार कर प्रतिदिन टीबी स्क्रीनिंग कैंप आयोजित करने, प्रत्येक कैंप की जीपीएस लोकेशन एवं फोटोग्राफ स्वास्थ्य विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा करने तथा लक्ष्य के अनुरूप स्क्रीनिंग, एक्स-रे, एनएएटी (NAAT), ट्रूनैट (TrueNat) जांच, टीपीटी और डिफरेंशिएटेड टीबी केयर की प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों को तत्काल चालू कराने, ट्रूनैट मशीन एवं माइक्रोस्कोप को कार्यशील रखने, एक्स-रे तकनीशियनों का प्रशिक्षण कराने तथा एसटीएस और एसटीएलएस की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया गया है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में संचालित स्क्रीनिंग गतिविधियों की निगरानी के लिए जिला कार्यक्रम समन्वयक, आरबीएसके टीम और डीईआईसी प्रबंधक को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान की नियमित समीक्षा मुख्य सचिव और जिला पदाधिकारी स्तर पर की जा रही है। ऐसे में अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हर हाल में 30 जुलाई तक निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सिविल सर्जन ने चेतावनी दी है कि अभियान में किसी भी स्तर की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।